
जोधपुर. अंतर प्रांतीय कुमार साहित्य परिषद् की ओर से गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र में लेखक से मिलिए कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इसमें मुख्य वक्ता वरिष्ठ कवि व निबंधकार सत्यदेव संवितेंद्र ने भाषा का लालित्य - समकालीन साहित्य विषय पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा किसी भी भाषा का लालित्य उसका नाभि स्वर होता है। जिसे रचनाकार अपने अनुभव संसार व संवेदना के तारों से जोड़ते हुए लोक के सम्मुख प्रस्तुत करता है। इस तरह कोई रचना विशेष कालजयी हो जाती है। उसमें लेखक की सृजनधर्मिता के साथ किसी भाषा विशेष की नैसर्गिक विशेषताओं का अपना एक महत्व होता है। कार्यक्रम व परिषद् के अध्यक्ष आलोचक मोहनकृष्ण बोहरा ने कहा कि भाषा का लालित्य शब्दों में होता अवश्य है पर वह उसके प्रयोग में ही प्रकट होता है। उन्होंने कहा कि कथा साहित्य में लालित्य घटनाओं की संगति पर निर्भर करेगा। निबंधों का लालित्य विचारों की संगति पर आश्रित रहेगा। इस प्रकार भाषा के लालित्य की कोई निरपेक्ष धारणा नहीं हो सकती।
परिषद की महामंत्री डॉ पद्मजा शर्मा ने बताया कि कार्यक्रम के प्रश्नोत्तर सत्र में उपस्थित श्रोताओं ने अपने प्रश्नों पूछे। जिसका मुख्य वक्ता की ओर से जवाब दिया गया। अंत में संगीत नाटक अकादमी के पूर्व अध्यक्ष रमेश बोराणा ने मुख्य वक्ता को स्मृति चिह्न प्रदान किया। वरिष्ठ कवि डॉ आईदान सिंह भाटी ने धन्यवाद ज्ञापित किया और रंगकर्मी कमलेश तिवारी ने मंच का संचालन किया। इस अवसर पर शाइर हबीब कैफी, इतिहासकार डॉ जहूर खां मेहर, मुरलीधर वैष्णव, जीके व्यास, डॉ निसार राही, डॉ गजेंसिंह राजपुरोहित व रेणु वर्मा आदि कई साहित्यकार, रंगकर्मी व साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।