
जोधपुर. अरब सागर में इस सप्ताह आए चक्रवाती तूफान ‘क्यार’ और ‘म्महा’ के वेग से पश्चिमी राजस्थान में बैठे टिड्डी दल ओमान व यमन पहुंच रहे हैं। शक्तिशाली तूफानी हवाएं उत्तर से पूर्व की तरफ बह रही हैं। यही वजह है कि भारत से उडक़र टिड्डी पश्चिम की ओर जा रही है। नवम्बर का पहला पखवाड़ा खत्म होते-होते भारत से टिड्डी समाप्त होने की उम्मीद है।
संयुक्त राष्ट्र संघ के खाद्य और कृषि संगठन के ताजा बुलेटिन के अनुसार टिड्डी का विंटर ब्रीडिंग शुरू हो गया है। प्रजनन के लिए टिड्डी दल पाकिस्तान के दक्षिण-पश्चिमी और इरान के दक्षिणी पूर्वी हिस्सों में जाएगी। नवंबर और दिसंबर तक वहां रहने के बाद टिड्डी जनवरी में स्प्रिंग ब्रीडिंग के लिए अफ्र ीकी देशों की ओर जाएगी। स्प्रिंग ब्रीडिंग जनवरी से जून तक रहेगी। सभी प्रभावित देशों को टिड्डी नियंत्रण कार्यक्रम में सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
भुज पहुंचे टिड्डी दल
जोधपुर स्थित टिड्डी चेतावनी संगठन के उपनिदेशक डॉ. केएल गुर्जर ने बताया कि इस सप्ताह भुज पहुंचे टिड्डी दलों पर काबू पा लिया है। इस समय जैसलमेर के मोहनगढ़ क्षेत्र, जोधपुर के बाप, बीकानेर के बज्जू क्षेत्र में टिड्डी है जिन्हें लगातार खत्म किया जा रहा है।
10 करोड से अधिक खर्च
भारत में 26 साल बाद इस साल बड़े पैमाने पर टिड्डी का हमला हुआ है। जैसलमेर क्षेत्र में पहली बार 21 मई को टिड्डी रिपोर्ट की गई थी। इसके बाद टिड्डी ने पूरे पश्चिमी राजस्थान को प्रभावित कर दिया। टिड्डी को काबू में करने के लिए भारत को करीब साढे छह करोड़ रुपए का पेस्टिसाइड सहित अन्य खर्चा करना पड़ा। कुल मिलाकर टिड्डी नियंत्रण में ₹10 करोड़ खर्च हो चुके हैं।