
अविनाश केवलिया. जोधपुर.
एक साल पहले पिछले मानसून में शहर के कई मकान ढह गए थे। जनहानि बड़े स्तर पर नहीं हुई लेकिन नुकसान ने व्यवस्थाओं पर सवालिया निशान खड़े किए। इस बार प्री-मानसून बारिश का दौर शुरू हो चुका है। फिर जर्जर भवन चिह्नित किए गए हैं और उनको चेतावनियों की औपचारिकता पूरी की जा रही है। लेकिन पत्रिका टीम ने पिछले बार जहां हादसे हुए उनके हालात जाने को कुछ ऐसा नजारा सामने आया।
आड़ा बाजार: नहीं सुधरे हालात
बाजार की मुख्य सडक़ पर पिछली बारिश में दो मंजिला एक मकान का अगला हिस्सा भरभरा कर गिर गया था। तब से लेकर अब तक वहां के हालात नहीं सुधरे। अब तक मलबा पड़ा है और मकान का बाकी का हिस्सा भी खतरा बना हुआ है।
त्रिपोलिया बाजार: नहीं ढहाया क्षतिग्रस्त हिस्सा
सबसे व्यस्त बाजार में से एक त्रिपोलिया में दुकानों के रहवासीय मकान का हिस्सा पिछले साल गिर गया था। इस हादसे से कुछ मिनट पहले ही एक व्यक्ति बाहर निकला व जनहानि बच गई। अब हालात यह है कि क्षतिग्रस्त मकान का मलबा तो हटा लिया है लेकिन अब तक बचा हुआ क्षतिग्रस्त हिस्सा नहीं ढहाया गया है। ऐसे में खतरा सिर पर लटक रहा है।
मसूरिया: खतरा अभी टला नहीं
मसूरिया पहाड़ी के नीचे बने मकानों पर एक बड़ा पत्थर गिरने से पूरा मकान क्षतिग्रस्त हो गया। पिछले मानसून के समय हुई इस घटना के कुछ मिनट पहले आवाज होने से परिवार के लोग बाहर निकल आए और जनहानि होने से बच गई। बड़े पत्थर को बाद में छोटे टुकड़े कर मलबे में बदल दिया। लेकिन खतरा टला नहीं। नगर निगम की ओर से यहां रहने वालों को आए दिन मकान खाली करने की चेतावनी दी जाती है।
सरदारपुरा: जानलेवा स्थान पर अब भी खतरा
गोल बिल्डिंग के समीप एक मकान का हिस्सा गिरने से महिला की मृत्यु भी हुई थी। इस जानलेवा स्थान पर एक साल बाद भी ज्यादा सुधार नहीं हुआ है। मलबे का कुछ हिस्सा अब तक पड़ा है और मकान का क्षतिग्रस्त हिस्सा अब तक खतरा बन लटक रहा है।
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अब 50 चेतावनियां जारी
इस साल भी बारिश से पहले जर्जर मकानों का चिह्निकरण कर 50 चेतावनियां जारी की गई है। इनको खुद ही मकान की मरम्मत करवाने या गिराने के नोटिस जारी किए गए हैं। लेकिन हर बार ही तरह इस बार भी यह औपचारिकता ही साबित होती नजर आ रही है।