
जोधपुर. विष्णु अवतार भगवान नृसिंह का प्राकट्ययोत्सव मंगलवार को घरों में मनाया जाएगा। जूनी मंडी स्थित गंगश्यामजी के मंदिर के बाहर नृसिंह चतुर्दशी को दशकों से चला आ रहा परम्परागत ‘मलूका मेला’ लगातार दूसरे साल भी कोरोना महामारी के कारण नहीं हो सकेगा। इस बार मंगलवार को स्वाति विशाखा नक्षत्र एवं वरियान-परिघ योग तथा तुला राशि के चंद्रमा की साक्षी में नृसिंह चतुर्दशी का योग बना है। इस दिन रवि योग से पर्व का आरंभ होगा। धर्म शास्त्रों की मान्यता अनुसार सूर्यास्त काल (प्रदोषकाल) के समय व्यापिनी चतुर्दशी का व्रत करना चाहिए। इसमें भी यदि स्वाति नक्षत्र हो तो वह अत्यंत श्रेष्ठ मानी जाती है। धर्मशास्त्र एवं निर्णय सिंधु में नृसिंह पुराण, स्कंद पुराण के अलग-अलग अभिमत प्राप्त होते हैं। जिसमें इस व्रत को करने वाले सभी व्रतियों को समस्त प्रकार के संकट एवं पापों की निवृत्ति का मार्ग बताया गया है। स्वाति नक्षत्र में रवि योग होने से शुभ रहेगी नृसिंह चतुर्दशी