
एम आई जाहिर/ जोधप़ुर. आज पूरा देश महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती ( 150th birth anniversary of Mahatma Gandhi ) मना रहा है। महात्मा गांधी ( Mahatma Gandhi ) ने स्वतंत्रता आंदोलन ( Freedom Movement ) के लिए पूरे देश में कई जगह यात्राएं की थीं, मगर महात्मा गांधी ( gandhi jayanti news ) चाह कर भी जोधपुर नहीं आ सके थे। वे ट्रेन से जोधपुर के लिए रवाना तो हुए थे, मगर जोधपुर स्टेशन तक नहीं पहुंच सके थे ( Mahatma Gandhi could not come to Jodhpur ) । अंग्रेजों के दबाव में चलने वाली रियासत की व्यक्तिगत ट्रेन के कारण लूणी तक ही आ सके । उन्हें जोधपुर तक नहीं आने दिया गया था।
हालांकि अपणायत का शहर हमेशा इस बात पर गर्व करता है कि यहां कई महापुरुष और विद्वान आए और कालांतर में जोधपुर में ही बस गए या इस शहर से इतने प्रभावित हुए कि इसे अपना शहर कहते हैं। इसके उलट बापू के साथ एेसा अच्छा अनुभव नहीं रहा। हम सब के श्रद्धेय बापू यानी साबरमती के संत महात्मा गांधी पूरे देश में स्वतंत्रता आंदोलन की अलख जगाने के लिए गए। इस दौरान उन्होंने कई शहरों की यात्राएं कीं। यह एक अफसोसनाक बात है कि वे चाहते हुए भी जोधपुर नहीं आ सके थे। वे ट्रेन में लूणी तक ही आ पाए थे। तथ्य यह है कि महात्मा गांधी को आजादी से पहले तत्कालीन कांग्रेस और स्वाधीनता सेनानियों ने जोधपुर बुलाया था। वे सन 1943 में ट्रेन से जोधपुर के लिए रवाना भी हुए थे, लेकिन अंग्रेजों के प्रभाव के कारण उन्हें जोधपुर तक नहीं आने दिया गया।
लूणी स्टेशन तक आए थे
राजस्थान पत्रिका ने अपने स्तर पर खोजबीन की तो जोधपुर में जन्मे राजस्थान के पहले संगीत निर्देशक स्व. बृजलाल वर्मा के पुत्र गोपालकृष्ण वर्मा से बातचीत में यह खुलासा हुआ। उन्होंने बताया कि उनके पिता ने बताया था कि जोधपुर के चुनिंदा बेबाक लोगों ने उनका लूणी स्टेशन पर स्वागत करना तय किया। तब बृजलाल वर्मा लूणी स्टेशन पर बापू से मिले थे।
छुआछूत की समस्या बताई थी
स्व. बृजलाल वर्मा के पुत्र गोपालकृष्ण वर्मा ने पत्रिका को बताया कि उनके पिता बृजलाल वर्मा ने अपने साथियों के साथ लूणी स्टेशन पहुंच कर उनका माल्यार्पण कर गर्मजोशी से स्वागत किया था। तब जोधपुर के स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों ने बताया था कि समाज के साथ इस हद छुआछूत हो रही है कि सफाई कर्मचारी भी सफाई करने के लिए नहीं आते। तब बापू ने दृढ़ता से अस्पृश्यता निवारण करवाने के लिए कहा था।
बापू से मिले थे वर्मा
उन्होंने बताया कि इससे पहले बापू कोलकाता से ट्रेन में कहीं जा रहे थे, तब पिता बृजलाल वर्मा कोलकाता रेलवे स्टेशन पर गांधी जी से मिले थे। उस समय सुभाषचंद्र बोस भी साथ में थे।