
पूनासर (जोधपुर) . इंसान जब कुछ करने की मन से सोच लेता है तो हजारों बाधाएं भी उन्हें रोक नहीं पाती है। क्षेत्र की नवसृजित ग्राम पंचायत विश्वकर्मानगर के रूपेलाव बेरा स्थित राउप्रावि में लम्बे अरसे से मरम्मत एवं रंगरोगन का कार्य किया हुआ नहीं था। कोरोना काल में जब बच्चे नहीं आ रहे थे तो शिक्षकों ने इस काम को अंजाम दिया।
विद्यालय में मरम्मत का कर्य पूरा करवानेे के बाद प्रधानाध्यापक भागीरथ नाहर की पहल पर पूरे स्टाफ ने मिलकर के रंगरोगन का कार्य पूरा किया वहीं विद्यालय के मुख्यद्वार पर शानदार नाम लिखकर के बोर्ड लगवा दिया, जिससे विद्यालय की आभा दुगुनी हो गई।
गणतंत्र दिवस के मौके पर शिक्षकों की मेहनत देख करके ग्रामीणों ने भी सहयोग में कोई कमी नहीं रखी और देखते ही देखते विद्यालय के सौंदर्य सुधार के लिए ग्रामीण भामाशाहों ने सवा लाख रुपए दे दिए। प्रधानाध्यापक नाहर ने बताया कि विद्यालय परिवार ने अपना घर समझ कर समर्पित भाव से विद्यालय में कोरोना काल के दौरान विद्यालय की दशा सुधारी तथा भामाशाहों के अथाह सहयोग से हमारे मन में और दुगुनी गति से कार्य करने की चाह पैदा हो गई है।
इन भामाशाहों ने किया सहयोग
विद्यालय में बच्चों के लिए स्टूल-टेबल के लिए भागीरथसिंह चम्पावत ने इक्कावन हजार रुपए का सहयोग किया तथा उपसरपंच चिम्माराम ने इक्कीस हजार एवं सरपंच प्रतिनिधि छैलुसिंह सोढ ने 11 हजार रुपए दिए। वहीं पूनाराम व पदमाराम सुथार ने 5100 रुपए, ग्रामीण रूपाराम एवं विद्यालय के स्टाफ नानकचंद, अशोक कुमार, मधु रिणवा, सरोज कुमारी एवं संस्था प्रधान भागीरथ नाहर एवं पीटीआई मांगीलाल ने 2100-2100 रुपए का सहयोग प्रदान किया।
वहीं बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने 1100 एवं 500 का आर्थिक सहयोग करके अपने विद्यालय के आदर्श विद्यालय के साथ-साथ स्वच्छ, सुंदर बनाने के लिए सहयोग प्रदान किया। लम्बे समय से विद्यालय की सुध नहीं ली गई थी, ऐसे में विद्यालय पूराना एवं खंडहर होने के कगार पर आ गया था। ऐसे में भामाशाहों के इन सहयोग से विद्यालय में नई जान आ जाएगी।
इनका कहना है
विद्यालय में बच्चों के बैठने के दौरान रंगरोगन के अभाव में सीमेंट आदि गिरता रहता था। इससे विद्यालय में बच्चों को बहुत परेशानी होती थी। इससे मेरा मन बहुत दुखी होता था। कोरोना काल के दौरान स्टाफ के साथियों के साथ मिलकर काम किया तथा शेष भी जल्द ही पूरा करके विद्यालय को सुंदर बनाएंगे।
-भागीरथ नाहर प्रधानाध्यापक राउप्रावि रूपेलाव बेरा, विश्वकर्मानगर।