
वीडियो : गौतम उडेलिया/जोधपुर. पारम्परिक स्नेह और मधुरता का पर्व मकर संक्रांति बुधवार को मनाया जा रहा है। सूर्यदेव मंगलवार देर रात्रि 2.06 बजे मकर राशि में प्रवेश करने के साथ ही ‘मळमास’ समाप्त हो गया। बुधवार को मकर संक्रांति का स्नान, दान और पुण्यकाल मनाया जा रहा है। सूर्योदय से सूर्यास्त तक दान-पुण्य के आयोजन हो रहे हैं। सूर्योपासना के पर्व मकर संक्रांति को जोधपुर शहर में विवाहित पुत्रियों को तिल से बने व्यंजन भेजने, घरों में पकौड़े-गुळगुले और बाजरे का खीच बनाने की परम्परा का भी निर्वहन किया जा रहा है।
ज्योतिषियों के अनुसार अशुभ योग और कुंडली के दुर्योग निवारण के लिए मकर संक्रांति पुण्यकाल में दान का महत्व है। संक्रांति पुण्यकाल में गायत्री मंत्र, पूजन, हवन, भगवान शिव का घी से अभिषेक, तीर्थ स्नान तथा गुड़ तिल-तेल से निर्मित वस्तुओं व ऊनी वस्त्र के दान करना चाहिए। मकर संक्रांति के उपलक्ष्य में तिल से बने व्यंजनों और महिलाओं की ओर से पारम्परिक तेरूंडे की वस्तुओं की खरीदारी के कारण मंगलवार को प्रमुख बाजारों में दिन भर रौनक छाई रही। मकर संक्रांति को इस बार बुधवार का संयोग होने से शहर के प्रमुख गणेश मंदिरों में प्रथम पूज्य को तिल के लड्डूओं का भोग लगाया जा रहा है। रातानाडा गणेश मंदिर, जूनी मंडी गुरु गणपति मंदिर, सोजतीगेट स्थित गढ़ लंबोदर मंदिर में विशेष शृंगार हुआ।
प्रत्येक 4 वर्ष में ऐसी स्थिति
वाराहमिहिर ज्योतिष अनुसन्धान केंद्र के पं. महेश मत्तड़ दर्शक ने बताया कि मकर संक्रांति का संबंध सीधा पृथ्वी के भूगोल और सूर्य की स्थिति से है। जब भी सूर्य मकर रेखा पर आता है, वह दिन 14 जनवरी ही होता है और उसी दिन मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जाता है। लेकिन प्रत्येक 4 वर्ष में ऐसी स्थिति आती है जब मकर संक्रांति पर्व 15 जनवरी को आता है। इस वर्ष मकर संक्रांति पर्व बुधवार को मनाया जाएगा। सभी संक्रांतियों में मकर संक्रांति सबसे प्रमुख संक्रांति हैं। ज्योतिष दृष्टि से देखें तो इस दिन सूर्य धनु राशि को छोडकऱ मकर राशि में प्रवेश करता है और सूर्य के उत्तरायण की गति प्रारंभ होती है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान भास्कर अपने पुत्र शनि से मिलने स्वयं उसके घर जाते हैं। महाभारत काल में भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागने के लिये मकर संक्रांति का ही चयन किया था।
इस माह होंगे चार नौ रेखी सावे
नववर्ष 2020 का प्रथम नौ रेखी सावा बुधवार को है। इस बार वर्ष 2020 में पिछले साल की तुलना में विवाह के 25 मुहूर्त कम होने के कारण शहनाइयां कम बजेगी। वर्ष 2019 में कुल 55 विवाह के शुभ मुहूर्त की तुलना में वर्ष 2020 में मात्र 31 दिन ही सावों की धूम रहेगी। पं. ओमदत्त शंकर ने बताया कि 15 जनवरी को प्रथम नौ रेखी सावा है। उसके बाद 29,30 व 31 जनवरी को भी नौ रेखी सावा होगा। आगामी फरवरी मास में 25 व 26 को भी 9 रेखी सावा है। होलाष्ठक 3 मार्च को लगने से पुन: 9 मार्च तक मांगलिक कार्य थम जाएंगे। मार्च 14 से 13 अप्रेल तक पुन: मळमास के कारण विवाह के मुहूर्त नहीं है।