
जोधपुर. एे म्हारी घूमर छे नखराळी एे मां...। जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग की ओर से शहर में आयोजित मारवाड़ समारोह के तहत मंगलवार सांझ ढले मंडोर उद्यान में पहली बार नर्तकियों ने बड़े पैमाने पर नखराळी घूमर नृत्य पेश कर मन मोह लिया। इस दौरान रंगबिरंगे आकर्षक परिधान पहने नर्तकियों की आकर्षक घूमर नृत्य की छटा से खूबसूरत समां नजर आया। देसी-विदेशी सैलानियों ने इसका खूब आनंद लिया। हर साल आने वाले पर्यटकों के लिए यह एक नया और सुखद अनुभव रहा।
गजब का सैर सपाटा
सैलानियों के साथ-साथ जोधपुर शहर के बाशिंदे बारिश में भीगे मंडोर गार्डन आ कर सैर सपाटा कर रहे हैं। यहां देसी विदेशी सैलानी और स्कूलों कॉलेजों के भ्रमण दल भी खूब आ रहे हैं। यानी पिकनिक और सैर सपाटे के लिए यह अहम स्थान है। कई फिल्मों व विज्ञापनों की शूटिंग का साक्षी है। ऊंची पहाड़ी से भी इसका दृ़श्य खूबसूरत नजर आता है।
इसमें सुधार करवाए थे
महाराजा अजीतसिंह और महाराजा अभयसिंह के शासनकाल (1714 ई. से लेकर 1749 ई.) में जोधपुर नगर का मण्डोर उद्यान व उसके संलग्न देवी-देवताओं की साल और मण्डोर की पुरानी कलात्मक इमारतें अजीतपोल इक थम्बिया महल, पुराना किला व उसके नीचे वाले मेहलात (वर्तमान म्यूजियम भवन) ऐतिहासिक व कलात्मक देवल, थड़े व छतरियों, नागादड़ी के संलग्न कुंओं, तालाबों व बावडिय़ों इत्यादि का निर्माण हुआ।
बदलती रही मंडोर की शक्ल
महाराजा उम्मेदसिंह से लेकर महाराजा हनवंतसिंह के शासनकाल तक मण्डोर गार्डन में कई सुधार कार्य हुए। वहीं 1923 ई. से 1947-48 ई. के दौरान मण्डोर गार्डन को आधुनिक ढंग से तैयार करवाया गया। आजादी के बाद मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाडिय़ा के समय वित्त मंत्री मथुरादास माथुर के प्रयासों से मण्डोर गार्डन की काया पलट करवाई गई। उद्यान में पानी के हौज, सर्च व फ्लड लाइटें व फव्वारे आदि लगाए गए और मण्डोर में गार्डन के ऊपर ऊंचाई वाले पहाड़ पर हैंगिंग गार्डन भी लगवाया गया। उद्यान के आधुनिक ढंग से विकास के लिए पीडब्ल्यूडी व उद्यान विभाग का भी योगदान सराहनीय रहा। इसकी कायापलट करने में मगराज जैसलमेरिया, सलेराज मुणोहित और दाऊदास शारदा की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही।