
अविनाश केवलिया/जोधपुर. निकाय चुनाव की सरगर्मियां अब शुरू हो गई हैं। वार्ड आरक्षण लॉटरी के बाद स्थिति साफ हो चुकी है, लेकिन महापौर पद को लेकर अब भी संशय बरकरार है। प्रदेश में कांग्रेस सरकार के पिछले कार्यकाल में पहली बार निकाय प्रमुख सीधे जनता द्वारा चुने गए। इसके बाद भाजपा सरकार ने इसे पलट कर फिर से पार्षदों के जरिए ही निकाय प्रमुख चयन की व्यवस्था की। लेकिन इस बार फिर कांग्रेस सरकार ने निकाय चुनावों में पुराने नियम लागू कर दिए।
सियासी गलियारों में चर्चा है कि खुद कांग्रेस सरकार ही अपने इस आदेश पर मंथन कर रही है। इसी वजह से अब तक निकाय प्रमुखों के पद की आरक्षण लॉटरी नहीं निकाली गई है। स्वायत्त शासन मंत्री के नेतृत्व में एक कमेटी बनाई गई है जो फीडबैक ले रही है। निकाय प्रमुख व महापौर पदों के लिए चल रहे इस मंथन के बीच पत्रिका ने सर्वे कर पार्षदों के साथ मतदाताओं की भी टोह ली। वर्तमान सभी 65 पार्षदों से बात करने के प्रयास किए गए, लेकिन करीब 60 प्रतिशत पार्षदों ने अपना पक्ष रखा। वहीं जनता की राय भी सोशल मीडिया के सर्वे के जरिए ली गई।
पार्षद सर्वे परिणाम
सवाल - महापौर कैसे चुना जाना चाहिए?
1. पार्षद ही चुने - 30 पार्षदों ने इसके पक्ष में हां कहा।
2. जनता ही चुने - 14 इसके पक्ष में बोले
(इस सर्वे में 65 में से 44 पार्षदों ने अपनी राय रखी)
जोधपुर पत्रिका फेसबुक पेज पर किया पोल
आपकी नजर में महापौर का चुनाव किस प्रकार होना चाहिए?
अपनी राय दें..
सीधा जनता द्वारा चयन - 89 प्रतिशत
पार्षदों द्वारा चयन - 11 प्रतिशत
दोनों प्रणालियों के क्या हैं फायदे-नुकसान
महापौर जनता चुने, ये आए तर्क
1- महापौर सीधा चुनकर आता है तो जनता उनसे सीधा संवाद कर सकती है।
2- महापौर की जनता के प्रति उसकी जवाबदारी होगी।
3- विकास कार्यों में किसी तरह का भेदभाव नहीं होगा।
पार्षद ही महापौर चुने, ये आए तर्क
1- सीधे महापौर जनता से चुने जाने के बाद वे पार्षदों की सुनवाई नहीं करते। ऐसे महापौर को हटाने का अधिकार भी पार्षदों के पास नहीं रहता।
2- जनता की समस्याएं पार्षद के जरिये महापौर के पास जानी चाहिए। हरेक वार्ड में पार्षद जनता की आवाज है।
3- बोर्ड किसी दूसरी पार्टी व महापौर किसी अन्य पार्टी का होने पर आपसी खींचतान रहती है।
महापौर के चयन के तरीके को लेकर क्या कहते हैं वर्तमान व पूर्व महापौर
वर्तमान महापौर
जैसे प्रधानमंत्री का चयन सांसद मिल कर करते हैं और मुख्यमंत्री का चयन विधायक करते हैं। उसी प्रकार महापौर का चयन भी पार्षदों को मिल कर करना चाहिए। सीधा चुनाव होता है तो उस व्यक्ति को किसी प्रकार का डर नहीं रहता। पार्षद जिस महापौर को चुनते हैं वह उस पर दबाव बनाकर काम करवा सकते हैं। यदि वह महापौर काम नहीं करता है तो उसे पार्षद अविश्वास प्रस्ताव से हटा सकते हैं। लेकिन सीधे जनता चुनती है तो उसके लिए दो-तिहाई जनता का अविश्वास लाकर हटाना होगा, जो कि संभव नहीं है।
- घनश्याम ओझा, महापौर, जोधपुर
जनता द्वारा चुने गए जोधपुर के पहले महापौर
इस पर मंथन फिलहाल सरकार कर रही है। वह जो निर्णय करती है उसको स्वीकार करना चाहिए। लेकिन मेरी एक अपील है कि महापौर ईमानदार और साफ छवि के व्यक्ति को बनाना चाहिए। वह जनता के विकास के लिए संकल्पित रहे।
- रामेश्वर दाधीच, पूर्व महापौर जोधपुर
कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने कहा-पार्षद चुने
पार्षद मिल कर चुने तो ही महापौर का चुनाव बेहतर होगा। इससे विकास भी अच्छा होगा। पार्षदों और महापौर के बीच पटरी भी बैठी रहेगी। साथ ही काम करने का दबाव भी रहेगा।
- सईद अंसारी, कांग्रेस जिलाध्यक्ष
जनता ही चुने महापौर
पहले भाजपा सरकार ने पार्षदों से महापौर चुनाव किया और कांग्रेस ने इसे बदल दिया। अब सीधे चुनाव को लेकर प्रदेश की जनता ने मानस बना लिया है। पीएम मोदी व भाजपा के प्रति मानस है तो कांग्रेस सरकार अपने ही फैसले से यू-टर्न कर रही है। मेरा मानना है इन परिस्थितियों में सीधा चुनाव होना चाहिए। अब निर्णय बदला जाता है तो हम सरकार को एक्सपोज करेंगे और विरोध करेंगे।
- जगतनारायण जोशी, भाजपा जिलाध्यक्ष
विधायक बोल...
ये तो सरकार ही तय करें
ये तो सरकार ही तय करे तो बेहतर है। अभी इस पर काम चल रहा है। जब मैं पार्षद थी तो महापौर पार्षदों ने चुना था। तब काम अच्छे हुए थे। लेकिन जब सीधे महापौर जनता से चुना तब भी काम अच्छा हुआ था। यह तो उस चुने हुए व्यक्ति पर निर्भर करता है कि विकास कार्य कैसे होंगे।
- मनीषा पंवार, विधायक जोधपुर शहर