
जोधपुर. नगर निगम में आम लोगों के काम बामुश्किल से होते हंै, लेकिन महापौर घनश्याम ओझा के आदेशों की पालना भी नगर निगम के कर्मचारी-अधिकारी ढंग से नहीं कर रहे हैं। दरअसल, महापौर ओझा ने आखलिया विकास योजना के भूखंड 36 बी की कम वसूली को लेकर पूर्व में गत वर्ष 27 अप्रेल से यूओ नोट निकाल रहे है। महापौर ने इस मामले को लेकर छठा यूओ नोट निकाला है। इससे पहले महापौर गत वर्ष 28 मई, 16 अगस्त, 26 अक्टूबर और 17 जनवरी को भी यूओ नोट निकाल चुके हैं।
दरअसल, एक शिकायतकर्ता ने बताया कि उनकी दादी ने जोधपुर विकास प्राधिकरण में 29 फरवरी 2010 को भूखंड नाम हस्तानांतरण की कार्रवाई में आपत्ति जताई थी। इस पर नाम हस्तानांतरण की कार्रवाई रोक दी गई। इस पर
प्रार्थी ने कोई जवाब पेश नहीं किया। न्यायालय में टाइटल, कब्जा व दस्तावेज पेश नहीं किया। फिर 22 मार्च 2017 को नया आवेदन तैयार कर बेचान अनुमति की मांग की। नाम हस्तानांतरण की कार्रवाई लंबित रखी। जेडीए ने पत्र में पूरा प्रकरण भी निगम में दिया। तत्कालीन उपायुक्त ने जमीन उजरदारी भी करवा दी। तत्कालीन उपायुक्त ने नाम हस्तानांतरण की फाइल को बगैर जांच पड़ताल के आगे बढ़ाया। भूखंड की आरक्षित दर आखलिया चौराहे से पांचवीं रोड तक की 5370 रुपए प्रति वर्ग फुट है। इसमें आरोपित को लाभ पहुंचाने के लिए आखलिया चौराहा से प्रतापनगर टैंपो स्टैंड की दर आरोपित की, जो 3680 रुपए वर्ग फीट होती है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि निगम को 11 लाख 47 हजार 2 सौ 12 रुपए की राजस्व हानि हुई है। नाम हस्तानांतरण में व्यवसायिक भूखंड में सौ मीटर पर शुल्क 2 प्रतिशत लिया जाता है, जो एक प्रतिशत लिया गया। इस प्रकार नाम हस्तानांतरण शुल्क व बेचान हस्तानांतरण शुल्क में भी नगर निगम को राजस्व नुकसान हुआ है। इसमें भी निगम को 76627 रुपए का नुकसान पहुंचाया गया है। रिजर्व प्राइज भी गलत अंकित की गई है। ये समस्त जानकारी शिकायतकर्ता ने निगम को बाकायदा लिखित में दी है। महापौर इस मामले में दूध का दूध और पानी का पानी करना चाहते है, लेकिन इस पर कोई तरीके से एक्शन नहीं लिया जा रहा है। प्रार्थी का आरोप है कि इस तरीके से नगर निगम को कुल 12, 23 हजार, 8 सौ, 39 रुपए वसूलने हैं। प्रार्थी ने कई फाइलें गायब होने की शिकायत भी की है। प्रार्थी और शिकायतकर्ता के मध्य प्रकरण भी न्यायालय में हंै। इस मामले में महापौर घनश्याम ओझा ने कहा कि संबंधित अधिकारी ने कोई तथ्यात्मक रिपोर्ट नहीं दी है और प्रकरण में वसूली नहीं की गई है। अब उन्होंने 7 दिन में रिपोर्ट पेश करने को कहा है।