
जोधपुर.
'मां-पापा, मामा, भाई-बहन मुझे माफ करना। मैं तुम्हें परेशान नहीं करना चाहती थी, पर मम्मी मुझसे सेल्फ रेस्पेक्ट के बिना नहीं जीया जाता। सर, आईएम सॉरी, आपने मुझे कुछ ज्यादा ही सुना दिया। मैं आपके सामने सॉरी भी नहीं बोल पाई। आईएम रियली वैरी-वैरी सॉरी। प्लीज एेसा किसी अन्य स्टूडेंट के साथ मत करना। सर, आपका व्यवहार अच्छा होगा, पर आज मेरे साथ अच्छा नहीं था। सर, मेरा स्कूल भी अच्छा था। मुझमें मैनर्स भी है। मम्मी, बड़े लोग अच्छे नहीं होते हैं।'
यह दर्द अलवर जिले की मुंडावर तहसील में सिहाली खुर्द निवासी रश्मि (21) पुत्री रामनिवास यादव ने अपने सुसाइड नोट में व्यक्त किया। यह सुसाइड नोट कमरे की तलाशी में पुलिस के हाथ लगा। उसने एम्स के एमबीबीएस में प्रवेश लेने के चौथे ही दिन गुरुवार रात छात्रावास के कमरे में फंदा लगाकर जान दे दी थी। पिता की शिकायत पर शास्त्रीनगर थाने में अज्ञात शिक्षक के खिलाफ शुक्रवार को हत्या का मामला दर्ज किया गया है।
थानाधिकारी अमित सिहाग मामले की जांच कर रहे हैं। पुलिस ने मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवा शव परिजन को सौंपा, जिसे लेकर गांव रवाना हो गए।
सर कौन ? टीचर या डॉक्टर ?
सुसाइड नोट से स्पष्ट है कि तीन दिन कॉलेज में पढ़ाई के दौरान रश्मि किसी शिक्षक के व्यवहार या डांटने से आहत थी। सुसाइड नोट में उसका नाम नहीं लिखा हुआ है। पुलिस का कहना है कि वो टीचर भी हो सकता है और डॉक्टर भी। इस बारे में जांच के बाद ही खुलासा होगा।
चार दिन पहले आई थी
अलवर में प्राचार्य रामनिवास यादव व उसकी पत्नी गत २३ जुलाई को पुत्री रश्मि के साथ एम्स आए थे। एमबीबीएस में प्रवेश के साथ ही छात्रावास में कमरे की व्यवस्था करवा दोनों उसी दिन गांव लौट गए। इसके बाद तीन दिन रश्मि कॉलेज गई थी। तीसरे दिन गुरुवार रात उसने कमरे में फंदा लगा लिया। उसके बाहर न आने पर साथियों ने तलाश की तो वह कमरे में फंदे पद लटकी मिली थी। उसे एम्स की आपातकालीन इकाई ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई थी।
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READ MORE : जोधपुर एम्स में पहले की घटनाएं
- 7 जुलाई 2015: जयपुर के फुलेरा निवासी एमबीबीएस छात्र गजेन्द्रसिंह (19) ने हॉस्टल रूम में फांसी लगाकर जान दे दी थी।
- 16 दिसम्बर 2017 : एम्स हॉस्टल में बाड़मेर जिले के बायतु निवासी एमबीबीएस के तृतीय सेमेस्टर के छात्र पाबूलाल (21) ने बालकॉनी से लटककर जान दे दी थी।
रश्मि की मौत खड़े कर गई कई सवाल
- अब तक घटनाओं के बाद भी एम्स प्रशासन की चुप्पी
जोधपुर.
पढ़ाई में शुरू से ही मेधावी रही अलवर की बेटी रश्मि को आखिरकर जोधपुर एम्स में एमबीबीएस में प्रवेश लेने के दूसरे ही दिन ऐसा खौफनाक कदम क्यों उठाना पड़ा। शुरू से पढ़ाई में अव्वल रही रश्मि कोटा व जयपुर में कोचिंग इस्टीट्यूट के हर एग्जाम में टॉप-10 रैंकिंग में रहती थी। वह कई मैडल जीत चुकी थी।
दो साल से बीकानेर के राजकीय महाविद्यालय में वैटनरी (पीवीटी) डिग्री कर रही थी। इस बीच ऑल इण्डिया कॉमन एंट्रेंस एग्जाम से 210 रैंक से एबीबीएस के लिए चयन हुआ। दूसरी वरीयता में उसने जोधपुर एम्स का चयन किया था। 23 जुलाई को परिजन एम्स में प्रवेश करवाकर गए थे। उसे यहां गल्र्स हॉस्टल में 114 नम्बर रूम आवंटित कर दिया गया। वह 24 व 25 जुलाई को सामान्य व खुश नजर आ रही थी। पिता रामपाल यादव के अनुसार उनकी 25 जुलाई शाम को बात हुई थी।
अधिकृत बयान से कतराते रहे अफसर
घटना को लेकर दूसरे दिन शुक्रवार को भी एम्स उपनिदेश डॉ. एनआर विश्नोई, छात्रावास प्रभारी प्रो. विजयलक्ष्मी, स्टूडेंट वैल्फेयर डीन डॉ. सुरजीत घटक इस बारे में कुछ भी कहने से कतराते रहे। छात्रावास प्रभारी प्रो. विजयलक्ष्मी इतना ही बोल पाई कि घटना से पूरे एम्स को शॉक लगा है। देर शाम उपनिदेशक डॉ. एनआर विश्नोई ने बताया कि छात्रा ने बंद कमरे में सुसाइड किया है। उसने ऐसा क्यों किया, यह पुलिस जांच से ही पता चलेगा।
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मेरी बेटी के साथ गलत हुआ
मेरी बेटी शुरू से ही पढ़ाई में मेधावी रही है। 25 जुलाई की रात 9 बजे भी उनकी बात बेटी से हुई थी। मेरी बेटी हिम्मतवाली थी। ऐसा कदम कभी नहीं उठा सकती। उसके साथ गलत हुआ होगा। इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
- रामनिवास यादव, रश्मि के पिता
परिजन के आरोप
- रश्मि के साथ घटना शाम छह बजे ही हो गई, लेकिन उन्हें सूचना रात साढ़े 9 बजे दी गई। पुलिस को सूचना भी उनको बताने के एक घंटे बाद साढ़े दस बजे दी गई।
- पुलिस की मौजूदगी के बिना शव को नीचे उतार लिया गया।
- गले में चोट व खून के निशान हैं। उसके साथ कुछ गलत हुआ है।