
जोधपुर. राजस्थान हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार (न्यायिक) को मेहरानगढ़ दुखांतिका की जांच के लिए गठित जस्टिस जसराज चौपड़ा आयोग की रिपोर्ट को लेकर दो कैबिनेट सब कमेटी के निष्कर्षों को खंडपीठ के समक्ष पेश करने के निर्देश दिए हैं। राज्य सरकार दो कैबिनेट सब कमेटी के निष्कर्षों को सीलबंद लिफाफे में दो साल पहले ही रजिस्ट्रार (न्यायिक) को सौंप चुकी हैं।
मुख्य न्यायाधीश इंद्रजीत महांति तथा न्यायाधीश विनित कुमार माथुर की खंडपीठ ने मेहरानगढ़ दुखांतिका संघर्ष समिति के सचिव मानाराम की ओर से दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए कहा कि कैबिनेट सब कमेटी की रिपोर्ट को अवलोकन के लिए खोला जाना आवश्यक है। कोर्ट ने अगली सुनवाई 6 सितंबर को मुकर्रर करते हुए महाधिवक्ता महेन्द्रसिंह सिंघवी को कहा कि यदि आवश्यक हो, तो अवलोकन के लिए एक सीलबंद लिफाफे में आयोग की रिपोर्ट भी साथ रखें।
दरअसल, पहली कैबिनेट सब कमेटी ने यह पाया था कि रिपोर्ट के भाग-2 में वर्णित कुछ तथ्य अनुमानों और मिथकों पर आधारित हैं, जिन्हें यदि सार्वजनिक डोमेन में रखा जाता है, तो इससे जनता पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। परिणामस्वरूप कानून और व्यवस्था की स्थिति खराब हो सकती है। मंत्रिमंडल सचिवालय के आदेश से वर्तमान सरकार के कार्यकाल में गठित दूसरी कैबिनेट सब कमेटी ने भी पूर्व कमेटी की अभिशंषा से सहमति व्यक्त की, जिसके बाद कैबिनेट ने भी चौपड़ा आयोग की रिपोर्ट को विधानसभा में नहीं रखने और न ही सार्वजनिक करने का निर्णय लिया था। गौरतलब है कि 30 सितंबर, 2008 को मेहरानगढ़ किले में स्थित चामुंडा माता मंदिर में नवरात्र के पहले दिन भगदड़ मे 216 लोगों की मौत हो गई थी। तत्कालीन भाजपा सरकार ने अक्टूबर 2008 में जस्टिस जसराज चोपड़ा की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन किया था जिसने त्रासदी की जांच की और जिम्मेदारी तय की। आयोग ने 5 मई, 2011 को कांग्रेस शासन के दौरान अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी।