जोधपुर

‘हलवे’ की तरह टिड्डी को खा रहे प्रवासी पक्षी और वन्यजीव, राज्यपक्षी गोडावण का भी प्रमुख आहार बनी टिड्डियां

सीमा पार से पश्चिमी राजस्थान में घुसे टिड्डी दल से निपटने के लिए विदेशों से माइक्रोनियर मशीनें आने से पहले विभिन्न प्रजातियों के पक्षी टिड्डियों का सफाया करने में जुट गए हैं। मेहमान पक्षियों के साथ रेगिस्तान के वन्यजीव मरु लोमड़ी, मरु बिल्ली, भारतीय लोमड़ी, जंगली बिल्ली, सियार, चंदन गोह, पाटा गोह, सांडा, इत्यादि भी टिड्डी घटाने में सहयोगी बने है।
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migratory birds and great indian bustard eating locust in rajasthan
‘हलवे’ की तरह टिड्डी को खा रहे प्रवासी पक्षी और वन्यजीव, राज्यपक्षी गोडावण का भी प्रमुख आहार बनी टिड्डियां

नंदकिशोर सारस्वत/जोधपुर. सीमा पार से पश्चिमी राजस्थान में घुसे टिड्डी दल से निपटने के लिए विदेशों से माइक्रोनियर मशीनें आने से पहले विभिन्न प्रजातियों के पक्षी टिड्डियों का सफाया करने में जुट गए हैं। राज्यपक्षी गोडावण के अलावा थार में मौजूद तिलोर, हुदहुद, कौवा, रोबिन्स, वेगटेल, लेप विंग्स, वेबलर, मोर, इग्रेट, ट्री पाइ, नीलकंठ, गौरैया, रेवन, मैना, कॉर्से, रोजी स्टर्लिंग, हैरियर, शिकरा, लग्गर फ ाल्कन, टॉनी ईगल, स्टेपी ईगल, स्पॉटेड ईगल, इंडियन रोलर, बी ईटर, कोयल, बुलबुल, रोजी पास्कर टिड्डियों को हलवे की तरह खा रहे हैं।

मेहमान पक्षियों के साथ रेगिस्तान के वन्यजीव मरु लोमड़ी, मरु बिल्ली, भारतीय लोमड़ी, जंगली बिल्ली, सियार, चंदन गोह, पाटा गोह, सांडा, इत्यादि भी टिड्डी घटाने में सहयोगी बने है। टिड्डियों के आगमन का सर्वाधिक लाभ इस बार राज्यपक्षी गोडावण ने उठाया है। प्रोटिन से भरे टिड्डे गोडावण के प्रजनन काल में पौष्टिक आहार का काम कर रहे हैं। इस बार जैसलमेर जिले में गोडावण के बच्चे काफ ी संख्या में देखे गए हैं। टिड्डियों पर निर्भर रहने से बच्चों का सही विकास हुआ है और जल्दी से बड़े भी हो रहे हैं। पक्षी विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को वन्यजीव बाहुल्य क्षेत्र में जानलेवा कीटनाशकों के छिडक़ाव से पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि क्या ये कीटनाशक हमारे पर्यावरण में तो नहीं जा रहे है।

पेड़ों पर बैठने वाले और छिपकली प्रजाति के जीवों के लिए टिड्डियां स्वादिष्ट भोजन हैं। टिड्डियों पर नेचुरल कंट्रोल तभी होगा जब प्राणी वहां मौजूद रहेगा। इसीलिए पक्षियों का संरक्षण और आगमन जरूरी है। सीमा पार से टिड्डियां जोधपुर शहर के आसपास तक पहुंचने का कारण यही है कि रेगिस्तान से पेड़ और पक्षी गायब होते जा रहे हैं।

- संजीव कुमार, पक्षी वैज्ञानिक, जेडएसआई जोधपुर


रसायन छिडक़ाव के बाद मृत टिड्डी का सेवन मेहमान पक्षियों के लिए घातक साबित हो सकता है। मृत टिड्डियों का सेवन यदि अधिक मात्रा में हो तो विषाक्त रसायन शरीर में पहुंचने से पक्षियों की मौत हो सकती है।
- हिम्मतसिंह पंवार, पक्षी वैज्ञानिक

टिड्डियों को नियंत्रित रखना है तो सर्व समाज को इनके ऊपर निर्भर पक्षियों और वन्यजीवों को बचना होगा। पक्षी और वन्यजीव हमारे पर्यावरण से हानिकारक कीटनाशकों को भी नियंत्रित कर सकते हैं।
- डॉ. सुमित डूकिया, पक्षी विशेषज्ञ

Published on:
12 Jan 2020 12:42 pm