
नंदकिशोर सारस्वत/जोधपुर. जोधपुर जिले में कुरजां के बाद आने वाले प्रवासी पक्षियों का सबसे बड़ा ‘रफ’ का समूह सूर्यनगरी के आसपास जलाशयों पर डेरा डाल चुका है। पश्चिमी यूरोप, अफ्रीका, दक्षिणी एशिया, स्पेन, डेनमार्क, स्वीडन, नार्वे के तटीय क्षेत्रों से पलायन कर फरवरी तक प्रवास पर आने वाले रफ पक्षियों को जोधपुर का अनुकूल वातावरण लगातार लुभाने लगा है।
नम भूमि पर झुण्ड के रूप में दिखाई देने वाले इन पक्षियों का मुख्य आहार समुद्री पानी के डायटन, घोंघे और कृष्टेशिया माने जाते हैं। पांच साल पहले शीतकाल के दौरान जोधपुर के आसपास नाममात्र नजर आने वाले ‘रफ’ पक्षियों की संख्या अब करीब 8 से 10 हजार तक जा पहुंची है। भूरे मटमैले रंग की आकर्षक चिडिय़ा मुख्यत: छिछले पानी में भोजन तलाश करती है।
प्राय: गुजरात के समुद्री तट के पास बहुतायत में नजर आने वाले पक्षियों को अब पश्चिमी राजस्थान का क्षेत्र रास आने लगा है। थार क्षेत्र में ‘रफ’ का पहुंचने का प्रमुख कारण नमकीन भूमि के साथ छिछले पानी में घोंघें तथा अन्य मौलस प्रजाति के कीड़ों का आहार मिलता है। पश्चिमी राजस्थान के थार इलाकों के खोखर, तालाबों में नमकीन पानी की बहुलता है।
विभिन्न आकृतियां बनाकर झुण्ड में भरते हैं उड़ान
एक साथ हजारों की झुण्ड में अलग-अलग तरह की आकृति बना कर उड़ान भरने वाले रफ पक्षी कीट-पतंगों के साथ धान-बीजों पर आश्रित रहता है। सुबह से शाम तक ये वेटलैंडस के ऊपर चक्कर काटते रहते हैं। वर्तमान में अखेराजजी का तालाब, जाजीवाल तालाब, कायलाना के आसपास पड़ाव डाल चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इनके प्राकृत आवासों के कम होने से गत एक दशक में इनकी तादाद में कमी देखी जा रही हैं। पक्षियों प्रति संवेदनशील होकर वेटलैंडस के आसपास आश्रय स्थलों के संरक्षण के समन्वित प्रयास करने चाहिए।
- शरद पुरोहित, पक्षी प्रवास विशेषज्ञ, जोधपुर