
NAND KISHORE SARASWAT
जोधपुर. संगीत को स्पर्श करना संभव नहीं, परन्तु संगीत जब हमें स्पर्श करता है तब जीवन में एक अद्भुत ऊर्जा का संचार होता है और हम आत्मा की तृप्ति तक पहुंचते हैं। संगीत के साथ यदि योग का समावेश हो जाए तो मनुष्य परमात्मा को पा लेता है।
विश्व संगीत एवं योग दिवस के संगम पर शास्त्रीय संगीतकार मोहन वीणा वादक वायुसैनिक शशिकांत कमल ने पत्रिका से बातचीत में यह बात कही। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी ने हमारे जीवन को और भी तनावग्रस्त कर दिया है। लॉकडाउन में निराशायुक्त वातावरण के कारण मनुष्य के मानसिक संतुलन पर गहरा प्रभाव पड़ा है। इस संकटकाल में उपजे तनाव को दूर करने में योग और संगीत एक मजबूत सहारा बनता जा रहा है।
ऑनलाइन म्यूजिक थेरेपी के माध्यम से शशिकांत कमल कई लोगों को नि:शुल्क लाभान्वित कर चुके हैं। बनारस घराने के सितार वादक पं. सतीश चंद्र श्रीवास्तव तालीम हासिल करने वाले शशिकांत का कहना है कि सभी को अपने जीवन के कुछ समय संगीत एवं योग को देना चाहिए। मनपसंद संगीत सुनने को दिनचर्या में शामिल जरूर करना चाहिए।
मन चित्त को शांत करता है संगीत
शास्त्रीय संगीत से कई तरह की बीमारियों में अत्यंत लाभकारी हैं। खास तौर से कोरोना जैसी बीमारी में भी इसके लाभ देखने को मिले है। राग-भैरवी, दरबारी, विहग, शिवरंजनी, तोड़ी, पुरियाधनाश्री आदि रागों को सुनने मात्र से विशेष लाभ मिलता है। राग भोपाली के बारे में कहा जाता है कि ये राग सीधा परमात्मा से जोड़ता है। मोहनवीणा एक आधुनिक वाद्ययन्त्र है जो की वीणा, सरोद, सितार के संगम से बना है। दैवीय वाद्य यंत्र मोहन वीणा के स्वर सीधे रूह तक पहुंचकर तनाव दूर करते है। हाई ब्लड प्रेशर के लिए वीणा वादन अति लाभकारी होता है।