जोधपुर

40 प्रतिशत से अधिक कॉलेज स्टूडेंट्स इंटरनेट के आदी

    देश के विभिन्न चिकित्सा संस्थानों के अध्ययन में खुलासा एम्स जोधपुर के चिकित्सकों का कहना 11 फीसदी से अधिक स्कूली स्टूडेंट्स में भी बढ़ रही समस्या
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Aug 25, 2021
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जोधपुर. कॉलेज के 40 प्रतिशत से अधिक स्टूडेंट्स इंटरनेट के आदी हैं और उनमें से कइयों में अवसाद के लक्षण दिखाई दे रहे हैं। यह स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय रोहतक, भोपाल मेमोरियल अस्पताल और अनुसंधान केंद्र भोपाल, पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ और एम्स जोधपुर व भुवनेश्वर और नई दिल्ली के संयुक्त रूप से किए गए एक अध्ययन से पता चला है। इस एडिक्शन के कारण कई विद्यार्थी बड़ी संख्या में कम और ज्यादा अवसाद का शिकार हुए हैं। इंटरनेट एडिक्शन का ज्यादा शिकार भी पुरुष हुए है। इसमें 2010-20 के दौरान प्रकाशित 50 अध्ययनों का विश्लेषण किया, जिसमें 19 राज्यों में 17-35 आयु वर्ग के छात्रों का सर्वेक्षण किया गया।

अध्ययन से पता चला है कि इंटरनेट की लत उन पुरुष छात्रों में अधिक है जो अपने घरों से दूर रहते हैं। वे ज्यादातर रात में इंटरनेट चलाते हैं और तीन घंटे से अधिक समय व्यतीत करते हैं।

इंटरनेट पर राष्ट्रीय नीति विकसित करने की दरकार
विशेषज्ञों ने अध्ययन में सुझाव दिया हैं कि युवा वयस्कों के बीच इंटरनेट के उपयोग पर एक राष्ट्रीय नीति विकसित करने की आवश्यकता है। सभी ने कहा कि यदि यह प्राथमिकता पर नहीं किया गया तो देश में इंटरनेट पर निर्भर एक बड़ी आबादी को चिकित्सा की आवश्यकता होगी। इंटरनेट के आदी लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने की जरूरत ज्यादा है। पीजीआई चंड़ीगढ़ के मनोविकार विभाग से डॉ. सुनील ग्रोवर ने बताया कि माता-पिता को बच्चे पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है, इंटरनेट का उपयोग बच्चे कम से कम करें, इस पर पूरा फोकस रखें।

11 प्रतिशत से अधिक स्कूल स्टूडेंट्स भी शिकार

11 प्रतिशत से अधिक स्कूली स्टूडेंट्स भी इंटरनेट एडिक्शन के शिकार हो चुके है। इसका असर आउटडोर में देखा जा सकता है। बच्चे यदि अधिक मात्रा में गेम डाउनलोड कर रहे हैं तो इसे भी हल्के में न लें। ये भी इंटरनेट एडिक्शन हैं। एडिक्शन का प्रथम कारण बच्चों में खोया-खोया रहना है, चुपचाप रहता है। इसे समझना जरूरी है। पैरेंट्स ध्यान रखें कि बच्चे इंटरनेट की लत से ग्रसित न हो। इसलिए उन्हें सीमित मात्रा में ही उपयोग करने को कहे। जबकि कॉलेज के स्टूडेंट्स 40 फीसदी से अधिक है।
- डॉ. नरेश नेभिनानी, विभागाध्यक्ष, मनोचिकित्सा विभाग, एम्स जोधपुर

Published on:
25 Aug 2021 11:37 pm