
जोधपुर. पितृ पक्ष समाप्ति के अगले दिन आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होने वाले शारदीय नवरात्र के लिए इस बार श्रद्धालुओं को पूरा एक महीने का इंतजार करना पड़ रहा हैं। इस साल आश्विन माह अधिक मास होने के कारण 17 अक्टूबर से नवरात्र शुरू होंगे। पं. ओमदत्त शंकर ने बताया नवरात्र में घट स्थापना के दिन सुबह चित्रा नक्षत्र होने से सुबह 11.51 बजे के बाद ही घट स्थापना करना श्रेष्ठ रहेगा। इसके अलावा भी अन्य कई मुहूर्त में माता की घट स्थापना हो सकेगी। दुर्गाष्टमी का पूजन भी इस बार सप्तमी तिथि को और नवमी का पूजन 24 अक्टूबर अष्टमी तिथि को होगा। विजयदशमी 25 को मनाई जाएगी। शहर के आद्यशक्ति मंदिरों में नवरात्र की तैयारियां प्रारंभ हो गई हैं । इस बार नवरात्र में खरीदारी के शुभ योग के कारण लंबे अर्से बाद बाजार में एक बार फिर से रौनक दिखाई देगी । इस बार शारदीय नवरात्र को मां दुर्गा का आगमन अश्व यानी घोड़े पर होगा ।
नवरात्र में सर्वार्थ सिद्धि योग की त्रिवेणी
ज्योतिषाचार्य पं. मोहनलाल गर्ग के अनुसार 17 अक्टूबर को घट स्थापना सर्वार्थ सिद्धि योग में होगी । इसके बाद 19 और 24 अक्टूबर को भी सर्वार्थसिद्धि योग रहेगा । इसी कड़ी में 19 अक्टूबर को द्विपुष्कर योग होने से शुभ कार्यों की शुरूआत हो जाएगी । नवरात्र में द्विपुष्कर योग सभी तरह की खरीदारी व शुभ कार्यों के लिए श्रेष्ठ रहेगा। हालांकि इस बार नवरात्र पर्व को लेकर कोरोना-19 को लेकर जारी गाइड लाइन के चलते माता के भक्तों में उत्साह में कमी देखी जा रही है ।
देवी मां का वार अनुसार वाहन
वैसे तो मां दुर्गा का वाहन सिंह को माना गया है , लेकिन हर साल नवरात्र के समय अलग अलग वार के अनुसार माता अलग अलग वाहनों पर सवार होकर होकर आती हैं । भागवत पुराण में इसका जिक्र मिलता है । यदि नवरात्र की शुरूआत सोमवार या रविवार को हो तो इसका मतलब माता हाथी पर आएगी । यदि शनिवार और मंगलवार को कलश स्थापना हो तो माता घोड़े पर सवार होकर आती है ।