
जयकुमार भाटी/जोधपुर. कहते है जात-पात व धर्म से बड़ी होती है मां की ममता। ऐसी ही मां की ममता जोधपुर के एमडीएम अस्पताल स्थित कोविड सेंटर में देखने को मिली। यहां भर्ती कोरोना संक्रमित एक प्रसूता आरती पत्नी सुनील ने 5 मई की रात करीब साढ़े दस बजे एक नवजात पुत्री को जन्म दिया। नवजात के जन्म के 24 घण्टे बाद ही कोरोना से लड़ रही आरती ने दम तोड़ दिया। ऐसे में बेबी वार्मर मशीन पर रह रही नवजात को लेबर रूम इंचार्ज नर्स गुरजीत कौर व सैकंड ग्रेड नर्स शगुफ्ता सैयद ने यशोदा मां बनकर संभालना शुरू कर दिया। तीन दिन की नवजात बच्ची ने अपनी मां को तो नहीं देखा लेकिन रमजान के पाक महीने में रोजे रख रही शगुफ्ता सैयद व गुरजीत कौर जैसी यशोदा मां के स्नेह से उसे कोरोना काल में भी नया जीवन मिलने लगा हैं। वहीं दोनों मां कोरोना योद्धा बनकर वार्ड में भर्ती प्रसूताओं का इलाज करने के साथ इस नवजात बच्ची की मां बनकर अपना फर्ज भी निभा रही हैं।
दो साल पहले हुई शादी
महामंदिर धड़ा बास निवासी आरती की शादी दो साल पहले डाली बाई मंदिर क्षेत्र निवासी सुनिल से हुई थी। शादी के बाद 21 वर्षीय आरती पहली बार गर्भवती हुई तो उसे कमला नेहरू नगर अस्पताल में रखा गया। लेकिन कोरोना से संक्रमित होने के बाद एमडीएम अस्पताल के मातृ एवं शिशु केन्द्र स्थित कोविड सेंटर में भर्ती किया गया। ऐसे में उसने पांच मई की रात को एक पुत्री को जन्म दिया और दूसरे दिन 24 घंटे बाद ही कोरोना से जंग हार गई। ऐसे में अब नवजात बच्ची की देखभाल के लिए पति सहित परिजन अस्पताल आ रहे है। लेकिन अभी नवजात बच्ची को बेबी वार्मर मशीन पर रखने से परिजनों से ज्यादा उसकी देखभाल व स्नेह वहां ड्यूटी करने वाली नर्स गुरजीत कौर व नर्स शगुफ्ता सैयद कर रही हैं।