
जोधपुर. हौसले बुलंद हो तो पर्वत भी आपके कदम चूमते हैं। इस कहावत को शहर के युवा पर्वतारोही सोहन तंवर ने सिद्ध कर दिखाया है। माउंट एवरेस्ट और अफ्रीका के माउंट किलिमंजारो फतह करने वाले सोहन अब दक्षिण अमरीका के अर्जेंटीना के सबसे ऊंचे पर्वत अकोंका गुआ की चढ़ाई की तैयारियों में जुट गए हैं। वह नवंबर माह में करीब 7 हजार मीटर ऊंचे इस पर्वत की चढ़ाई शुरू करेंगे। सोहन ने दावा किया है कि राजस्थान से वह पहले पर्वतारोही होगा जो इस पर्वत शृंखला पर चढ़ाई करेगा।
सोहन ने बताया कि बचपन से ही उन्हें एडवेंचर व थ्रिलर फिल्में देखने का शौक रहा है। इसी के चलते उनमें पर्वतारोही बनने का जज्बा जागा। 2018 में इसकी शुरुआत की। पर्वतारोहियों के दल से जुड़ कर माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई शुरू की। इस दौरान देश की प्रथम महिला पर्वतारोही बेछेंद्री पाल से मुलाकात की। उनकी बातों से हौसला बढ़ा। करीब डेढ़ महीने के प्रयास के बाद दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर तिरंगा फहराया। फिर सोहन ने सभी महाद्वीपों केऊंचे पर्वतों को फतह करने की ठानी।
किया मौत का सामना
एवरेस्ट के बाद सोहन ने अफ्रीका महाद्वीप स्थित 5.8 मीटर ऊंचे माउंट किलिमंजारो की चढ़ाई की। करीब 3 दिनों की चढ़ाई कर सोहन ने चोटी पर 51 फीट लंबा तिरंगा लहराया। सोहन ने बताया कि चोटी पर अधिक समय तक रुकने की मनाही है। इसके बावजूद तिरंगा लहराने के कुछ देर बाद उनकी सांसे उखडऩे लगी और वह बेहोश हो गया। शेरपाओं की सहायता से नीचे लाकर चिकित्सकीय उपचार किया गया।
मुख्यमंत्री ने बढ़ाया हौसला
सोहन ने बताया कि अफ्रीका जाने से पूर्व उसने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाकात की थी। मुख्यमंत्री ने हौसला बढ़ाते हुए यह 51 फीट का तिरंगा भेंट किया था। साथ ही आर्थिक सहायता के तौर पर 51 हजार की राशि प्रदान की थी। किसी पर्वत पर इतना लंबा झंडा लहराने के लिए सोहन का नाम गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है। सोहन ने कहा कि राज्य सरकार पर्वतारोहण को स्पोट्र्स कोटे में सम्मिलित करे। तंवर ने बताया कि पर्वतारोही होने के लिए हौसला, स्टेमिना, नियमित कसरत व अच्छा खानपान होना जरूरी है। सोहन के पिता अमरलाल तंवर पेंटर हैं व माता प्रेम देवी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं।