
जोधपुर।
न तो सीवरेज की सुविधा है और न ही पानी का ड्रेनेज होता है। सफाई और कचरा एकत्रित करने भी वहां दिनभर में कोई नहीं आता। यह कोई गांव के हालात नहीं है, बल्कि शहर के मध्य बसे ट्रांसपोर्ट नगर की स्थिति है। नए ट्रासंपोर्ट नगर की प्लानिंग को लेकर सवाल खड़े हुए तो ट्रांसपोर्ट व्यापारियों और कार्मिकों ने पिछली योजना की खामियां भी सामने लाना शुरू किया है।
बासनी क्षेत्र में ट्रांसपोर्ट नगर संकरी सडक़ें, पार्र्किंग जैसी बातों के अलावा आधारभूत सुविधाएं तक नहीं है। पिछले दो दशक में जहां सीवरेज की लाइन तक नहीं आ पाई। ऐसे में सडक़ो पर ही गंदा पानी जमा हो जाता है। बारिश के दिनों में तो पूरा ट्रांसपोर्ट नगर तालाब ही बन जाता है। सफाई राम भरोसे है। इस योजना को यूआइटी ने विकसित कर नगर निगम को सौंप दिया, लेकिन नगर निगम ने भी इसे पूरी तरह से नहीं अपनाया।
दावा स्वच्छता सर्वेक्षण का मगर सफाई ही नहीं
एक ओर दोनों नगर निगम स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर दावे कर रहे हैं, लेकिन ट्रांसपोर्ट नगर में न तो नियमित सफाई होती है और न ही कचरा पात्र की व्यवस्था है। यदि कोई व्यापारी कचरा एकत्रित भी करता है तो नियमित रूप से गाड़ी भी नहीं है वहां जो कचरा संग्रहण कर सके।
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फोटो 63 :: कई बार शिकायतें की
वर्तमान ट्रांसपोर्ट नगर को लेकर हमने कइ बार शिकायतें की, आश्वासन हर बार मिलता है। लेकिन आज तक स्थाई समाधान नहीं हुआ।
- महावीरसिंह चौधरी, उपाध्यक्ष, सूर्यनगरी ट्रांसपोर्ट ऑनर वेलफेयर सोसायटी
फोटो 64 ::: सफाई तक नहीं होती
सफाई भी नियमित नहीं है। सीवरेज और ड्रेनेज नहीं होने से हालात खराब है। कचरा भी सुबह के समय ट्रांसपोर्ट नगर में ही जलाते हैं। इससे प्रदूषण बढ़ रहा है।
- पारसमल जैन, व्यापारी