
जोधपुर।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने पीएचईडी (PHED) को लूणी ब्लॉक (Luni Block) में पेयजल के अलावा अन्य गतिविधियों में पानी की औसल खपत का पता लगाने की सलाह दी है। यह सलाह केन्द्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) की ओर से लूणी ब्लॉक में भूजल स्तर पर प्रस्तुत रिपोर्ट के बाद दी गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2014 के बाद से लूणी ब्लॉक में भूजल का स्तर लगाता बढ़ रहा है।
एनजीटी ने कहा कि बढ़ते भूजल स्तर को ध्यान में रखते हुए जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की ओर से की जा रही पेयजल आपूर्ति को अन्य गतिविधियों के लिए प्रतिबंधित करना उचित होगा। एनजीटी ने बुधवार को जोजरी नदी में टेक्सटाइल व अन्य औद्योगिक इकाइयों से अनुपचारित पानी से फैल रहे प्रदूषण के मामले में सुनवाई के दौरान यह बात कहीं।
एनजीटी ने सुनवाई के दौरान कहा कि इस बारे में अंतिम राय लेने से पहले चाहेंगे कि पीएचइडी एक तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करे। इसमें क्षेत्र में घरेलू व अन्य गतिविधियों में पानी की औसत खपत का पता लगाने और पानी का पेयजल के अलावा अन्य उपयोग पर प्रतिबंध लगाने के तरीके बताए जाएं। यह भी बताया जाए कि प्रतिबंध के निर्देश का उल्लंघन करने वालों का कैसे पता लगाया जाएगा और इनके विरुद्ध विभाग क्या कदम उठाएगा। एनजीटी ने प्रदेश के अतिरिक्त महाधिवक्ता को निर्देश दिए कि वे पीएचइडी जोधपुर के असिस्टेंट चीफ इंजीनियर से इसकी जानकारी लेकर अवगत कराए।
सीजीडब्ल्यूबी को आदेश
एनजीटी ने केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) को निर्देश दिए कि वह ब्लॉक के अन्य क्षेत्रों में भूजल स्तर का अध्ययन कर तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करे। मामले की अगली सुनवाई १५ नवम्बर को होगी।