
कर्तव्य की वेदी पर बलिदान होने वाले शेरगढ तहसील के सोलंकिया तला निवासी लांस नायक शहीद लुम्बाराम आज भी सरकारी सम्मान को तरस रहे हैं। इससे गांव व क्षेत्र के शहीद समर्थकों व शहीद को अपना प्रेरणास्त्रोत मानने वाले युवाओं में भारी रोष है। हालांकि शहीद होने पर सरकार ने इनके नाम स्मारक बनवाने और स्कूल का नामकरण करवाने की औपचारिक घोषणाएं तो कीए लेकिन इन्हें कभी पूरा नहीं हुआ। अब शहीद के पुत्र ने खुद अपनी पैतृक जमीन पर पिता का स्मारक बनवाया है।
सम्मान दिलाने के लिए यह लिया निर्णय..
शहीद पुत्र धर्मपाल गोरा ने कि कहा कि प्रशासन व सरकार से अपनी जायज मांगे पूरी नही होते देखकर उन्होंने अपने शहीद पिता को सम्मान दिलाने के लिए यह निर्णय लिया है। शहीद लुम्बाराम की इस प्रतिमा का अनावरण समारोह अब मंगलवार को होगा। प्रतिमा का अनावरण 10पैरा कमान के अधिकारी एवं उपकमान अधिकारी एवं जिला सैनिक कल्याण बोर्ड शेरगढ़ के कर्नल गुमान सिंह करेंगे। कार्यक्रम में प्रतिपक्ष नेता रामेश्वर डूंडी सहित शेरगढ़ विधायक बाबूसिंह राठौड़ एवं अन्य नेतागण शिरकत करेंगे। अनावरण समारोह से एक दिन पूर्व सोमवार को गांव में रात्रि जागरण व विराट कवि सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा।
ऑपरेशन पवन में हुए शहीद
ऑपरेशन पवन में हुए थे शहीद लांस नायक लुम्बाराम 10 अक्टुबर 1987 को ऑपरेशन पवन में शहीद हुए। पिता फैजाराम व माता पारूदेवी के पुत्र लुम्बाराम ने अपनी प्रारम्भिक पढाई निकटवर्ती गॉव सोमेसर से अर्जित की और इसके बाद 27 दिसम्बर 1971 को वे भारतीय सेना मे सैनिक के रूप मे भर्ती हो गए। विधिवत् सैन्य ट्रिनिग के बाद उनकी नियुक्ति 10 पैरा में की गई। 1987 मे सरकार ने ऑपरेशन पवन शुरू किया गया। इसमें भारतीय सेना श्रीलंका सरकार की याचना पर तमिल विद्रोहियो के खिलाफ श्रींलका रवाना हुई। चुनिंदा बटालियनो में 10 पैरा सैन्य टुकड़ी का भी चयन श्रीलंका जाने के लिए किया गया। 10 अक्टूबर 1987 को जाफना के कोकोविल इलाके मे समंदर के किनारे नायक लुम्बाराम अपनी यूनिट के साथ पेट्रोलिंग कर रहे थेए तभी अचानक एलटीटी उग्रवादियों की ओर से किए गए बम विस्फोट में नायक लुम्बाराम का तूप उड गया और अपने 5 साथियो के साथ नायक लुम्बाराम वीरगति को प्राप्त हो गए।