
जोधपुर।
राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मण्डल ने कोरोना की दूसरी लहर से उत्पन्न संकट काल को देखते हुए बड़ा फैसला किया है। जिसके अनुसार, कोरोना बीमारी के इलाज में काम आने वाली दवाइयों, जीवन रक्षक उपकरणों, ऑक्सीजन सिलेण्डर प्लांट आदि इकाइयां स्थापित करने व इकाई संचालन के लिए प्रदूषण मण्डल से ली जाने वाले अनुमति की जरुरत नहीं होगी। प्रदूषण मण्डल के इस निर्णय से इन क्षेत्रों के उद्यमियों को राहत मिली है। इस प्रकार की इकाइयां लगाने पर 30 जुलाई तक छूट दी गई है।
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इन इकाइयों की स्थापना के लिए मिली छूट
- सभी जीवन रक्षक चिकित्सा उपकरण (वेंटिलेटर, बॉय पाप्स,स्ट्रेचर्स, व्हीलचेयर्स, आईसीयू उपकरण) इकाइयां।
- जीवन रक्षक दवाइयां, जो डीजीसीआई, आईसीएमआर, स्वास्थ्य विभाग या सक्षम प्राधिकारी द्वार सूचीबद्ध की गई होगी (यह केवल ड्रग फार्मुलेशन इकाइयों के लिए लागू होगा तथा बेसिक ड्रग मैन्यूफेक्चरिंग इकाइयों के लिए लागू नहीं होगा)।
- व्यक्तिगत सुरक्षा गियर, जिमसें पीपीई किट, फेस मास्क निर्माण इकाइयां ।
- सेनिटाइजर्स बॉटलिंग, फार्मुलेशन, मैन्यूफेक्चरिंग इकाइयां ।
- ऑक्सीजन गैस विनिर्माण व बॉटलिंग प्लांट है।
- नाइट्रोजन विनिर्माण गैस प्लांट, जो ऑक्सीजन विनिर्माण गैस प्लांट में परिवर्तित हो रहे है, ऐसी इकाइयां की स्थापना व संचालन के लिए अनुमति से छूट दी गई है।
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एनओसी में छूट
वहीं मण्डल ने 18 अप्रेल से 31 जून के बीच औद्योगिक इकाइयों, खानों, सेवाओं आदि की सहमति व प्राधिकरण की वैधता को 31 जुलाई तक बढ़ाया है। ऐसी सभी इकाइयां 31 जुलाई या उससे पहले सहमति व प्राधिकरण के लिए आवेदन करेंगी। ऐसी स्थिति में इन इकाइयों पर कोई पेनल्टी नहीं लगाई जाएगी।
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कोरोना काल में जीवन रक्षक दवाइयां, उपकरण इकाइयां व ऑक्सीजन प्लांट की स्थापना व संचालन के लिए अनुमति लेने से छूट देकर राहत दी है।
अमित शर्मा, क्षेत्रीय अधिकारी
राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मण्डल जोधपुर