
जोधपुर।
राज्य सरकार ने प्रदेश में कृषि को महत्व व बढ़ावा देने, किसानों का आर्थिक जीवन स्तर सुधारने व कृषि गतिविधियों के विस्तार के लिए अलग से कृषि बजट पेश किया। साथ ही, किसानों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं भी संचालित की जा रही है। जबकि प्रदेश में कृषि शोध-अनुसंधान, उच्च कृषि शिक्षा के लिए संचालित विश्वविद्यालयों में इसका उल्टा हो रहा है। प्रदेश में 5 कृषि विश्वविद्यालयों में से 4 कृषि विश्वविद्यालय बिना कुलपति के ही संचालित हो रहे है, जबकि पांचवे कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति का कार्यकाल इसी माह 27 सितम्बर को पूरा होने वाला है।
----
कृषि विश्वविद्यालय-------------- कुलपति------- कार्यकाल समाप्त होने की तिथि
कृषि विश्वविद्यालय कोटा ------ डॉ डीसी जोशी ---- 21 अगस्त
कृषि विश्वविद्यालय बीकानेर--- डॉ आरपी सिंह --- 22 अगस्त
कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर---- प्रो बीआर चौधरी---- 22 अगस्त
कृषि विश्वविद्यालय उदयपुर---- डॉ एनएस राठौड़ ---- 23 अगस्त
-----------
इनका कार्यकाल भी 27 को समाप्त
जोबनेर िस्थत श्री कर्ण नगेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो जीतसिंह संधू का कार्यकाल 27 सितम्बर को पूरा होने वाला है। इसके बाद, प्रदेश के सभी कृषि विश्वविद्यालयों में कुलपतियों के पद रिक्त हो जाएंगे। अगर सरकार, आगामी दिनों में कोटा, बीकानेर, जोधपुर व उदयपुर सहित जोबनेर के नए कुलपतियों की घोषणा कर देती है, जो इन विश्वविद्यालयों में शिक्षण सहित अन्य गतिवधियों का सुचारु संचालन हो जाएगा।
-------
पद खाली रहने का असर
- कुलपति के नहीं रहने से एकेडमिक कैलेंडर पर असर पड़ता है।
- विश्वविद्यालय की प्रशासनिक गतिविधियों पर असर पड़ता है।- शिक्षक और कर्मचारी के कामकाज से लेकर प्रमोशन पर भी असर पड़ता है।
- विश्वविद्यालय और उससे संबंधित कॉलेजों से जुड़े बड़े फैसले कार्यवाहक या प्रभारी कुलपति नहीं ले पाते हैं।- कार्यवाहक या प्रभारी कुलपतियों को वित्तीय व नीतिगत अधिकार नहीं होता।
---