जोधपुर

पर्याप्त संख्या में उडऩ दस्ते ही नहीं, कैसे रूकेंगे वन अपराध

  -संभाग में निरंतर बढ़ रहे हैं वन भूमि में अवैध खनन, अतिक्रमण व पेड़ कटने के मामले  
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Jun 15, 2021
पर्याप्त संख्या में उडऩ दस्ते ही नहीं, कैसे रूकेंगे वन अपराध
पर्याप्त संख्या में उडऩ दस्ते ही नहीं, कैसे रूकेंगे वन अपराध

NAND KISHORE SARASWAT

जोधपुर. वनभूमि पर अवैध खनन और अतिक्रमण की रोकथाम के लिए संभाग में एक दो जिलों को छोड़कर कहीं भी वनविभाग का उडऩदस्ता तक नहीं है। यहां तक जोधपुर संभाग मुख्यालय में भी उडऩदस्ता प्रभारी एवं अधीनस्थ सहायक अमले के पद रिक्त होने से वन अपराधों पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। नतीजन अवैध खनन, लकड़ी परिवहन व आरा मशीनों जैसे मामलों में लिप्त दोषियों से जुर्माने के रूप में सरकार को मिलने वाले राजस्व का नुकसान हो रहा है। केवल वन्यजीव मंडल जोधपुर, माउंट आबू और जैसलमेर में ही वन्यजीव उडऩदस्ता है।
एक उडऩदस्ते के लिए एक क्षेत्रीय वन अधिकारी के अधीनस्थ दो वनपाल, दो सहायक वनपाल, चार वन रक्षक, दो केटल गार्ड और एक पूर्णकालिक वाहन होना आवश्यक है। उडऩदस्ते की कम से कम दो पारियां और अधिकतम तीन पारियां होनी चाहिए। उडऩदस्ते की गतिशीलता को त्वरित बनाए रखने के लिए वाहन के साथ उसके संधारण से संबंधित पर्याप्त बजट का प्रावधान भी रखे जाने से ही पर्यावरण की सुरक्षा संभव है। लेकिन 80 के दशक के बाद से उडऩ दस्तों के लिए पर्याप्त स्टाफ व संसाधन ही नहीं मिल रहे।

प्रकरण ही दर्ज नहीं हो पा रहे

संभाग की लाखों हेक्टेयर वनभूमि पर रोजाना हजारों की संख्या में हो रहे अतिक्रमण, अवैध कटान, अवैध खनन, वन्यजीव शिकार, सीमा चिह्नों की तोडफ़ोड़, पेड़ों को काटकर लकडिय़ों की तस्करी, अवैध आरा मशीनों के संचालन की रोकथाम के लिए पूरे संभाग में हर साल नाम मात्र के प्रकरण दर्ज हो पाते है।

पर्याप्त स्टाफ का अभाव है कारण
जोधपुर संभाग के वनमंडलों में क्षेत्रीय वन अधिकारियों की कमी और पर्याप्त स्टाफ का अभाव है। इसी कारण उडऩदस्ता प्रभारी का दायित्व कई जगहों पर रेंजर अथवा वनपालों को ही दिया गया है। संभाग के सिरोही व जैसलमेर में विभाग का उडऩदस्ता है, लेकिन जोधपुर में नहीं है।

-एसआरवी मूर्ति, मुख्य वन संरक्षक, जोधपुर संभाग

Published on:
15 Jun 2021 11:23 am