जोधपुर

अब विदेशों में भी बढऩे लगी है बिलाड़ा के कपास की मांग

बिलाड़ा (जोधपुर). अब बिलाड़ा की कपास नगरी के रूप में पहचान बनने लगी है। यहां की कपास मंडी से केवल मारवाड़ ही नहीं बल्कि विभिन्न प्रदेशों व विदेशों में कपास जाने लगी है।
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Oct 29, 2018
Now in the foreign country, demand of bilaras cotton
cotton

बिलाड़ा (जोधपुर). अब बिलाड़ा की कपास नगरी के रूप में पहचान बनने लगी है। यहां की कपास मंडी से केवल मारवाड़ ही नहीं बल्कि विभिन्न प्रदेशों व विदेशों में कपास जाने लगी है।

भारतीय कपास निगम भी यहां के व्यापारियों के मार्फत कपास की खरीद कर गांठें बंधवाने लगा है, जो चीन, कोरिया, जापान, पाकिस्तान एवं बांग्लादेश तक पहुंचती है।


मांग बढऩे के साथ यहां कपास की आवक ने जोर पकड़ा है। बिलाड़ा मंडी में पाली, नागौर, बाड़मेर, जैसलमेर जिलों के अतिरिक्त रणसीगांव, बोरून्दा, भोपालगढ़, आसोप, मेड़ता क्षेत्र से पर्याप्त मात्रा में कपास यहां की मंडी में बिकने के लिए आने लगा है।

मंडी में ज्यो-ज्यों कपास की आवक बढऩे लगी वैसे ही उद्यमियों ने जीनिंग फैक्ट्रियां लगाने में रूचि दिखाई। कुछ वर्षों पहले तक पाली की महाराजा मिल, ब्यावर, विजयनगर, गुलाबपुरा और भीलवाड़ा की मिलों तक कपास की आपूर्ति बोरों में भर कर की जाती थी, लेकिन अब मांग बढने से कांडला पोर्ट, मध्यप्रदेश, चीन, कोरिया, जापान और बांग्लादेश तक कपास की मांग रहती है।

जब से किसानों की बी.टी. किस्म की कपास के प्रति रुचि बढ़ी तभी से यहां आवक भी बढऩे लगी। इस दौरान बोरून्दा, आसोप, भोपालगढ़ में भी कपास के व्यापारी के साथ जिनिंग फैक्ट्रियां अस्तित्व में आने लगी, लेकिन गांठें बांधने का काम बिलाड़ा में ही शुरू हुआ। इतना ही नहीं अब पंजाब के व्यापारी भी यहां की उन्नत किस्म की बी.टी. कपास पसंद करने लगे हैं तथा अन्य देशों में कपास का निर्यात करने लगे है।


देचू भी बनने लगा कपास खरीद केंद्र


देचू. किसानों का कपास के प्रति रुझान बढऩे से अब स्थानीय बाजार में कपास की बिक्री भी बढ़ गई है। अब कपास की उपज आने के साथ ही देचू के बाजार में कपास की खरीदी भी व्यापक स्तर पर शुरू होने लगी है।

एक अनुमान के मुताबिक पंचायत समिति देचू की ग्रामीण क्षेत्रों के किसान पूर्व में सरसों, मूंगफली, बाजार, गेहूं, प्याज, रायड़ा, अरण्डी की खेती में रुचि रखते थे। इन फसलों में लागत कम मिलने के साथ मानव श्रम और कीटनाशक की भी अधिक जरूरत रहती है।

इन सब के बावजूद वांछित मूल्य नहीं पर इन किसानों ने खेती में बदलाव लाना शुरू किया। यही कारण है कि अब देचू पंचायत समिति क्षेत्र के गुमानपुरा, बुड़किया, आसरलाई, ऊंटवालिया, चांदसमा, मंडला कल्ला, कोलू पाबूजी सहित अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में इस बार 1600 हेक्टेयर की तुलना में 1966 हेक्टेयर कपास की बुवाई की गई है। यदि कपास के प्रति रुझान बना रहा तो वह दिन दूर नहीं जब देचू में कपास मंडी के रूप में पहचान बना सकेगा।

देचू के कपास खरीदार राजू हरकूट ने बताया कि 56 रुपए प्रति किलो कपास की खरीद हो रहा है। अच्छी कपास की 62 रुपए किलो से खरीद होगी। देचू के पीलवा रोड व गुमानपुरा में कपास के खरीदारी हो रही हैं। जहां पर कपास बेचने के लिए सुबह से शाम तक किसानों कपास से लदे ट्रैक्टर लेकर यहां पहुंच रहे हैं।

Updated on:
30 Oct 2018 12:18 am
Published on:
29 Oct 2018 11:43 pm