जोधपुर

अब तीन बार से अधिक नहीं बदल सकेंगे जांच

एक ही मुकदमे में बार-बार अनुसंधान बदलने का मामला
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Now inquary can not change more than three times
अब तीन बार से अधिक नहीं बदल सकेंगे जांच

जोधपुर

अब किसी मामले में तीन बार से अधिक अनुसंधान अधिकारी नहीं बदला जा सकेगा। पहली बार जिलास्तर पर पुलिस उपायुक्त अथवा एसपी की ओर से, दूसरी बार रेंज पुलिस महानिरीक्षक या पुलिस आयुक्त और तीसरी बार सिर्फ पुलिस महानिदेशक ही अनुसंधान अधिकारी बदल सकेंगे।

इसके बावजूद यदि कोई जांच बदली गई तो जांच बदलने वाला अधिकारी का व्यक्तिगत तौर पर उत्तरदायी होगा।


राजस्थान उच्च न्यायालय में सोमवार को उप राजकीय अधिवक्ता विक्रमसिंह राजपुरोहित के साथ पेश महानिरीक्षक सीआइडी सीबी महेन्द्रसिंह ने इस आशय का गृह विभाग की ओर से जारी सर्कुलर पेश किया। इसके साथ ही डॉ. जस्टिस पुष्पेन्द्रसिंह भाटी ने रघुनाथ दास की ओर से धारा 482 के तहत दायर याचिका का निस्तारण कर दिया।

हाईकोर्ट ने गत चार अक्टूबर को इस मामले की पिछली सुनवाई में पुलिस विभाग और राज्य सरकार को इस बारे में जवाब पेश करने के निर्देश दिए थे कि किसी भी मामले में बार-बार अनुसंधान बदलने के मामले में कैसे सुधार हो सकता है।

यह था मामला

रघुनाथदास ने 20 दिसम्बर 2016 को जायल (नागौर) थाने में सुरेश दास व अन्य के खिलाफ मारपीट के आरोप में मुकदमा दायर किया था। इस मामले की हेड कांस्टेबल से लेकर चार अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारियों ने जांच की, इसके बाद भी कुछ नहीं हुआ।

हाईकोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए अतिरिक्त महानिदेशक सीआइडी (क्राइम ब्रांच) से स्पष्टीकरण कर मांगा था।

-एक ही मुकदमे में बार-बार अनुसंधान बदलने का मामला

जोधपुरअब किसी मामले में तीन बार से अधिक अनुसंधान अधिकारी नहीं बदला जा सकेगा। पहली बार जिलास्तर पर पुलिस उपायुक्त अथवा एसपी की ओर से, दूसरी बार रेंज पुलिस महानिरीक्षक या पुलिस आयुक्त और तीसरी बार सिर्फ पुलिस महानिदेशक ही अनुसंधान अधिकारी बदल सकेंगे। इसके बावजूद यदि कोई जांच बदली गई तो जांच बदलने वाला अधिकारी का व्यक्तिगत तौर पर उत्तरदायी होगा।
राजस्थान उच्च न्यायालय में सोमवार को उप राजकीय अधिवक्ता विक्रमसिंह राजपुरोहित के साथ पेश महानिरीक्षक सीआइडी सीबी महेन्द्रसिंह ने इस आशय का गृह विभाग की ओर से जारी सर्कुलर पेश किया। इसके साथ ही डॉ. जस्टिस पुष्पेन्द्रसिंह भाटी ने रघुनाथ दास की ओर से धारा 482 के तहत दायर याचिका का निस्तारण कर दिया।

हाईकोर्ट ने गत चार अक्टूबर को इस मामले की पिछली सुनवाई में पुलिस विभाग और राज्य सरकार को इस बारे में जवाब पेश करने के निर्देश दिए थे कि किसी भी मामले में बार-बार अनुसंधान बदलने के मामले में कैसे सुधार हो सकता है।

यह था मामला

रघुनाथदास ने 20 दिसम्बर 2016 को जायल (नागौर) थाने में सुरेश दास व अन्य के खिलाफ मारपीट के आरोप में मुकदमा दायर किया था। इस मामले की हेड कांस्टेबल से लेकर चार अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारियों ने जांच की, इसके बाद भी कुछ नहीं हुआ। हाईकोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए अतिरिक्त महानिदेशक सीआइडी (क्राइम ब्रांच) से स्पष्टीकरण कर मांगा था।

Published on:
08 Jan 2019 12:46 am