
जोधपुर। जोधपुर-बालेसर में चल रही क्वारी लाइसेंसों (छोटी खानें, जो 1 हैक्टेयर से कम क्षेत्र में विकसित हो) के भविष्य पर खान विभाग के अधिकारी कुण्डली मारकर बैठे हैं। पिछले करीब छह माह से सिम्प्लीफाइड माइनिंग स्कीम (एसएमएस) अनुमोदन का काम अधिकारी एक-दूसरे पर डाल रहे हैं। लेकिन राहत देने के लिए कोई कदम नहीं उठा रहा है। खास बात यह है कि अधिकारियों की इस हठधर्मिता से 12 हजार खानों पर संकट खड़ा हो गया है। जोधपुर-बालेसर में चल रही करीब 12 हजार क्वारी लाइसेंसों के एसएमएस मार्च 2018 में ही पूरे हो गए थे।
बाद में, खानधारकों ने अगले पांच वर्षो के लिए एसएमएस बनाकर पेश कर दिए। विभाग की ओर से एसएमएस अनुमोदन नहीं किए जाने से खानधारक दुविधा में हैं। खानधारकों की ओर से एसएमएस पेश करने के बाद विभाग की ओर से एसएमएस पेश करने वाली खानों का मौका-निरीक्षण कर एसएमएस अनुमोदन करना होता है, हाल यह है कि, विभाग की ओर से मौका-निरीक्षण भी नहीं किया गया है। खानधारकों को हर 5 वर्ष में सिम्प्लीफाइड माइनिंग स्कीम (एसएमएस) बनानी होती हैं। खान विभाग द्वारा अनुमोदित होने पर ही वे संचालित हो सकती है। नियमानुसार, एसएमएस अनुमोदन के बिना क्वारी लाइसेंसों को अवैध घोषित करने व खनन कार्य बंद करने का प्रावधान हैं। एसएमएस में खान में पत्थर उत्पादन, पर्यावरण संरक्षण, प्लांटेशन, पानी के छिडक़ाव व खनन संचालन संबंधित जानकारी देनी होती है। पहले ही खनन कार्यों से जुड़े मजदूरों की रोजी-रोटी पर सकंट के बादल गहराने लगे हैं। खनन कार्यों में हो रही देरी से इन मजदूरों के लिए दो जून की रोटी का जुगाड़ करने भी मुश्किल हो रहा है।
अधिकारी कहिन
एसएमएस अनुमोदन का चार्ज सहायक खनिज अभियंता के पास है। खानधारकों की ओर से पेश एसएमएस में से कितनों का अनुमोदन हुआ, नहीं हुआ या वे क्यों नहीं कर रहे है। इसके लिए सहायक खनिज अभियंता अधिकृत है, वे ही पूरी जानकारी दे पाएंगे।
श्रीकृष्ण शर्मा, खनिज अभियंता
यह जानकारी खनिज अभियंता (एमई) से पूछो, वे ही बताएंगे।
रंजीतसिंह, सहायक खनिज अभियंता