
जोधपुर. केंद्र सरकार की ओर से स्वीकृत पीएसए ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट अब केवल मथुरादास माथुर अस्पताल में ही लगाया जाएगा। केंद्र व राज्य सरकारों में आपसी समन्वय की कमी के कारण महात्मा गांधी अस्पताल और उम्मेद अस्पताल में लाखों रुपए से खड़े किए गए स्ट्रक्चर बेकार हो गए हैं। अकेले एमडीएम अस्पताल में ही तीनों अस्पतालों की यूनिट का प्लांट लगाया जा रहा है। एमडीएमएच में आधारभूत संरचना खड़ी करके कम्पनी को ऑक्सीजन मशीनरी के लिए ऑर्डर दे दिया गया है। यहां निर्माण कार्य दिसम्बर में शुरू किया गया था जो बीच में बंद कर दिया गया। मरीजों की बाढ़ आने के बाद एक सप्ताह पहले ही वापस निर्माण कार्य शुरू किया गया है। अगर समय पर निर्माण हो जाता तो आज जोधपुर में ऑक्सीजन की मारामारी नहीं होती और तीनों ही अस्पतालों में इस प्लांट से प्रतिदिन 200 से 250 सिलेण्डर मिलते।
कोविड-19 प्रथम फेज से सबक लेते हुए केंद्र सरकार ने गत वर्ष देशभर में 162 प्रेशर सिविंग एब्जोर्पशन (पीएसए) ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट लगाने को मंजूरी दी। अब तक इसमें से केवल 33 ही लगे हैं। राजस्थान में तो एक भी नहीं लगा। जोधपुर के मथुरादास माथुर अस्पताल, महात्मा गांधी अस्पताल और उम्मेद अस्पताल में दिसम्बर 2020 में प्लांट के लिए निर्माण कार्य शुरू करके अधूरा छोड़ दिया गया। केवल पिलर खड़े किए गए। अब जब कोविड-19 के दूसरे फेज में ऑक्सीजन की मारामारी मची है तब सरकारों ने प्लांट पर ध्यान देना शुरू किया।
उम्मेद और गांधी से 1.50-1.50 लाख अतिरिक्त मांगे, फिर भी प्लांट नहीं
एमडीएम अस्पताल में 3200 लीटर प्रति मिनट (एलपीएम) क्षमता का प्लांट लगाया जा रहा है। इससे पहले तीनों अस्पतालों में 1200-1200 एलपीएम के प्लांट लगने थे लेकिन निर्माण एजेंसी राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम), मशीन की आपूर्ति करने वाली केंद्र सरकार की ही केंद्रीय औषधि आपूर्ति भण्डार (सीएमएसएस) और राज्य सरकार में तालमेल की भारी कमी रही। एनआरएचएम ने उम्मेद और गांधी अस्पताल में अतिरिक्त खर्चा बताकर 1.50-1.50 लाख रुपए और देने के बात कही। दोनों ही अस्पतालों इस पर सहमति भी दी। उम्मेद में तो पूरे स्ट्रक्चर को तोडकऱ नया बनाया गया। गांधी अस्पताल में भी जमीन कम पडऩे पर प्लांट के लिए काफी कशमकश की। अब इन दोनों अस्पतालों में केवल निर्माण करके छोड़ दिया गया है।
3 में से 1 यूनिट आएगी
एमडीएम अस्पताल में तीन यूनिट लगाई जा रही है। सबसे पहले एक यूनिट आएगी। सिविल कार्य के बाद इसे स्थापित करने में 7 से 10 दिन लग जाएंगे। इससे 200 सिलेण्डर 24 घण्टे में तैयार हो जाएंगे।
औरंगाबाद से आएगी मशीनरी
प्लांट की मशीनरी का खर्चा केंद्र सरकार उठा रही है। राज्य सरकार प्लेटफॉर्म बनाकर दे रही है। मशीन के लिए औरंगाबाद की कम्पनी एरोक्स टेक्नोलॉजी का टैंडर दिया गया है। देश में एक साथ मशीनरी की जरुरत पडऩे पर कम्पनी पर भार बढ़ गया है। शहर के आधा दर्जन निजी अस्पतालों में इसी कम्पनी के ऑक्सीजन प्लांट लगे हुए हैं। पीएसए ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट हवा में मौजूद ऑक्सीजन को खींचता है।