
फलोदी (जोधपुर). शहर का रेलवे स्टेशन हो या आस-पास की सडक़ें, हर जगह इन दिनों कई परिवार अपने पूरे घरेलू सामान के साथ यहां बैठे दिखाई देते हैं। ये परिवार कोई यात्रा नहीं कर रहे है और न ही कोई धार्मिक स्थल के दर्शन के लिए आए है। ये परिवार यहां मजदूरी के लिए आते हैं। जो खास तौर पर सितम्बर-अक्टूबर माह में कपास की चुगाई से मजदूरी करते हैं।
ये अधिकांश मजदूर परिवार हरियाणा के हैं और अपने गांवों में मजदूरी नहीं होने के कारण पूरे परिवार के साथ प्रतिवर्ष यहां आ पंहुचते हैं। जब तक इन मजदूर परिवारों को यहां काम नहीं मिलता है, तब तक सडक़, रेलवे स्टेशन आदि स्थान ही इनका ठिकाना बना रहता है। गौरतलब है कि फलोदी क्षेत्र में बड़ी संख्या में कृषि फार्मों पर कपास की बुवाई होती है और बम्पर पैदावार होती है।
चुगाई में है माहिर
मजदूरी के लिए यहां आने वाले ये मजदूर परिवार कपास की चुगाई में माहिर होते हैं और पूरा परिवार मिलकर एक साथ काम करता है। ये मजदूर प्रति क्ंिवटल कपास चुगाई के लिए 700-800 रुपए की मजदूरी लेते हैं तथा एक मजदूर रोजाना करीब 60-70 किलो कपास की चुगाई कर देता हैं। यहां करीब एक माह तक मजदूरी के बाद ये परिवार वापस अपने गांव चले जाते हैं।
सडक़ ही है ठिकाना
यहां कपास की चुगाई के लिए आने वाले अधिकांश परिवार हरियाणा से आते हैं और रेल से उतरकर रेलवे स्टेशन व आस-पास सडक़ों व फुटपाथ पर बैठ जाते हैं। इस दौरान यहां पंहुचने के बाद यहां के किसान सडक़ पर ही आकर अपने कृषि फार्म पर मजदूरी के लिए बातचीत करते हैं। जब तक इन मजदूर परिवारों को काम नहीं मिलता है, तब तक ये परिवार सडक़ किनारे ही सामान से भरी गठरियों के साथ अपना घर बसाए रहते हैं। यहीं खाना बनाकर और यहीं सो जाते हैं। यहां के किसान से बातचीत होने के बाद इन मजदूर परिवारों को कृषि फार्म तक ले जाने की व्यवस्था किसान ही करते हैं तथा काम के दौरान वे मजदूरी के साथ रोजाना आवश्यकतानुसार आटा, चाय, राशन सामग्री आदि सामान भी लेते हैं।
बच्चों को स्कूल से छुट्टी दिलाकर लाते हैं साथ
हरियाणा निवासी मजदूर सुरेश कुमार ने बताया कि गांव में मजदूरी की कमी होने पर यहां कपास की चुगाई के लिए आ जाते हैं तथा अपने बच्चों को स्कूल से जैसे-तैसे ही एक माह तक की छुट्टी दिलाकर साथ लाते हैं।