
जोधपुर. मथुरादास माथुर अस्पताल में सोमवार को मनमानी व संवेदनहीनता का नजारा देखने को मिला। यहां एम्स अस्पताल से मथुरादास माथुर अस्पताल में एक मरीज को डॉक्टरों ने आउटडोर बंद होने के कारण भर्ती नहीं किया। एक अन्य मरीज को ट्रोली नहीं मिलने के कारण इंतजार करना पड़ा। दोनों मरीज दो घंटे तक इंतजार करते रहे। आखिरकार पत्रिका टीम के दखल के बाद अस्पताल के जिम्मेदार जागे।
दरअसल, 25 जून को बाड़मेर के खुड़ाला स्थित गोदरों की बेरी निवासी कैंसर रोगी 35 वर्षीय पप्पू देवी को एम्स में भर्ती किया गया। उसे सोमवार को रेडियोथेरेपी के लिए एमडीएम अस्पताल के रेडियोथेरेपी विभाग में रैफ र कर दिया गया। एम्स से एमडीएम के ट्रोमा सेंटर में पहुंचे परिजनों को चिकित्सकों ने इलाज करने से इनकार कर दिया। जवाब में कहा कि सुबह आठ बजे ओपीडी टाइम में आकर मरीज को दिखाना और फिर भर्ती करेंगे। परिजन मरीज को लेकर अस्पताल परिसर के अंदर बैठ गए। पत्रिका टीम के पहुंचने पर अस्पताल प्रशासन ने मरीज को ट्रोमा इमरजेंसी में भर्ती किया।
जमीन पर लेटा करता रहा इंतजार
जैसलमेर से आए ८० वर्षीय बीराराम को गैस व पेट की अन्य बीमारी के बाद भर्ती कर लिया, लेकिन वार्ड में ले जाने के लिए ट्रॉली नहीं थी। परिजन इधर-उधर हाथ पांव मारते रहे। पत्रिका टीम ने फर्श पर लेटे मरीज का फोटो लिया तो सुपरवाइजर ने आकर ट्रोली उपलब्ध करवाई और ट्रॉलीमैन भी।
अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल
अस्पताल में ओपीडी का समय खत्म होने के बाद दोपहर की शिफ्ट में छह ट्रॉली मैन लगाए गए हैं, लेकिन अधिकांश मरीजों को न तो ट्रोली मिलती है नहीं ट्रॉलीमैन। सभी ट्रोलियां ट्रोमा सेंटर के अंदर घुसते ही छह नंबर कमरे में पड़ी रहती है।
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इनका कहना
मैं पता करवाता हूं। किसी भी मरीज को कल आने की बात नहीं की जा सकती है। आउटडोर बंद हुआ है, तो इमरजेंसी में मरीज को भेजा सकता है।
डॉ. महेन्द्र आसेरी, अधीक्षक, एमडीएम अस्पताल