
सुरेश व्यास/जोधपुर. नागरिकता के लिए बरसों से इंतजार कर रहे हजारों पाकिस्तानी विस्थापित हिंदू परिवारों को कोरोना कवच भी नहीं मिल पा रहा है। केंद्र और राज्य सरकारें ये तय नहीं कर पा रही कि वैध पहचान कार्ड के अभाव में इन्हें किस श्रेणी में रखकर कोरोना का टीका लगाया जाए। मामला राजस्थान हाईकोर्ट भी पहुंचा है, लेकिन विस्थापितों को कोरोना कवच की कोई राह नजर नहीं आ रही। वैक्सीनेशन के लिए आधार या पहचान कार्ड की अनिवार्यता कई लोगों के आड़े आई है। इनमें से साधु-संतों, भिखारी आदि बेघर लोगों, कैदियों, मानसिक विमंदित गृहों, वृद्धाश्रम और पुनर्वास केंद्रों में रहने वाले बिना पहचान पत्र वाले लोगों के टीकाकरण को तो केंद्र सरकार ने गत ६ मई को हरी झंडी दे दी, लेकिन विस्थापितों के लिए अब तक कोई फैसला नहीं हो पाया है। राज्य सरकार भी कोई फैसला नहीं कर रही है।
आधार कार्ड बना बाधा
विस्थापितों के पास उनकी पहचान के दस्तावेज तो हैं, लेकिन वैक्सीनेशन के लिए जरूरी आधार कार्ड जैसे वैध पहचान पत्र नहीं है। नागरिकता मिले बिना आधार कार्ड बन नहीं सकता। ऐसे में सरकारी एजेंसियां इनका टीकाकरण नहीं करवा पा रही। विस्थापितों के लॉन्ग टर्म वीजा (एलटीवी) या पासपोर्ट जैसे दस्तावेजों को वैध दस्तावेज घोषित करने से ही इनका टीकाकरण हो सकता है।
दस मौतें, 50 संक्रमित
प्रदेश में लगभग 30 हजार पाक विस्थापित हैं। इनमें से 22 हजार 146 विस्थापित एलटीवी पर रह रहे हैं। इनमें से लगभग 90 फीसदी जोधपुर व आसपास के इलाकों में है। जोधपुर में अधिकांशत: कच्ची बस्तियों में रहने वाले करीब दस विस्थापित कोरोना से जान गंवा चुके हैं और 50 से ज्यादा संक्रमित हैं। करीब 2 हजार विस्थापितों में कोरोना के लक्षण पाए गए हैं।
आधार कार्ड नहीं होना सबसे बड़ी बाधा
आधार कार्ड का न होना पाक प्रवासियों के टीकाकरण में सबसे बड़ी बाधा है। पासपोर्ट, रेजिडेंशियस परमिट या फिर लॉन्ग टर्म वीजा के आधार पर विस्थापितों के टीकाकरण के लिए मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। केंद्र सरकार से भी राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून व प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना में विस्थापितों को शामिल करने का अनुरोध किया है।
-हिन्दूसिंह सोढ़ा, अध्यक्ष, सीमांत लोक संगठन, जोधपुर