
गजेंद्रसिंह दहिया/जोधपुर. अंतरराष्ट्रीय मंच पर बार-बार भारत को परमाणु बम की गीदड़ भभकी देने वाले पाकिस्तान के पास टिड्डी मारने के लिए पेस्टिसाइड तक नहीं है। पाकिस्तान इसे चीन से आयात कर रहा है। पिछले 4 माह में पाकिस्तान ने चीन से कई बार पेस्टिसाइड मंगाया। हाल ही में पेस्टिसाइड खत्म होने के बाद वहां टिड्डी नियंत्रण कार्यक्रम ठप हो गया। नतीजन सीमा पार कर जैसलमेर और बीकानेर क्षेत्र में घुस आए टिड्डी दल पर भारत को पेस्टिसाइड स्प्रे करना पड़ा।
भारत और पाक के टिड्डी नियंत्रण अधिकारियों के बीच पिछले 4 माह में 4 बैठकें हो चुकी हैं। लेकिन पाकिस्तान अपनी हेकड़ी के चलते भारत से पेस्टिसाइड खरीदने में आनाकानी करता है। गौरतलब है कि 2 दिन पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए एक बार फिर से परमाणु बम की धमकी दी थी।इस साल लाल सागर के दोनों और टिड्डी ब्रीडिंग अधिक होने से 90 के दशक के बाद भारत-पाकिस्तान की ओर टिड्डी का बड़ा आउटब्रेक हुआ है।
पाकिस्तान के बलूचिस्तान में मई में टिड्डी प्रवेश कर गई थी। इसके बाद पाकिस्तान ने चीन से विशेष पेस्टिसाइड मंगाकर कर नियंत्रण कार्यक्रम शुरू किया। महीने के आखिर में भारत में भी टिड्डी का प्रवेश हो गया। जोधपुर स्थित टिड्डी चेतावनी संगठन (एलडब्ल्यूओ) से निपटने के लिए पहले से ही तैयार था और पेस्टिसाइड का लगातार स्प्रे कर अब तक टिड्डी को चार-पांच जिलों से आगे बढऩे नहीं दिया है।
5.5 करोड़ का पेस्टीसाइड छिडक़ चुका है भारत
टिड्डी मारने के लिए भारत में मैलाथिन का उपयोग होता है। केवल मुंबई स्थित हिंदुस्तान इंसेक्टीसाइड लिमिटेड (एचआइएल) में इसका उत्पादन होता है। पिछले चार महीनों में 1.75 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में 1.25 लाख लीटर मैलाथिन का टिड्डी पर स्प्रे किया जा चुका है, जिसकी कीमत 5.50 करोड़ रुपए है।
वाघा बॉर्डर के रास्ते ट्रक भिजवा देते
एचआइएल से हर दूसरे-तीसरे दिन 6 हजार लीटर पेस्टीसाइड जोधपुर आ रहा है। अगर पाकिस्तान भारत से मैलाथिन मांगता तो वाघा बॉर्डर के जरिए भिजवा देते। इससे भारत में टिड्डी नियंत्रण करने में ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ती। उधर पाकिस्तान में चीन से आयातित महंगा पेस्टीसाइड एक पखवाड़े से खत्म है। इस कारण रहीमयार खान, बहावलपुर और आसपास के क्षेत्रों में विकसित टिड्डी के बड़े झुण्ड हवा के साथ भारत की ओर आ रहे हैं।