
अविनाश केवलिया/जोधपुर. एक-एक वोट की कीमत क्या होती है यह राज्य सरकार की नई घोषणा के बाद सार्थक साबित हो सकती है। 10-12 हजार लोगों पर एक पार्षद की नीति अब बदल गई है। 4 हजार लोग से भी कम लोग अपना पार्षद चुन लेंगे। एक वार्ड में यदि दोनों राजनीतिक पाॢटयों के अलावा त्रिकोणीय मुकाबला हुआ तो समझो एक-एक व्यक्ति को घर से निकाल कर बूथ तक लाना होगा।
10 लाख से अधिक आबादी वाले तीन शहरों में राज्य सरकार ने दो-दो नगर निगम की व्यवस्था कर दी है। जोधपुर शहर का ढांचागत विकास दो भागों में बंट जाएगा। 80-80 वार्ड के साथ महापौर, उप महापौर व पूरी शहरी सरकार अलग होगी। पिछले चुनाव में 65 वार्ड होने पर जहां एक पार्षद बनने के लिए नेताओं को 10-12 हजार लोगों से सम्पर्क कर वोट अपील करनी थी। वहीं अब 160 वार्ड बनने के बाद एक प्रत्याशी को 4 से 5 हजार लोगों से ही वोट अपीलकरनी है।
वोट अंतर कम हो सकता है
पिछले चुनाव में औसत वोट अंतर 1000 से अधिक था। लेकिन इस बार यह 100 से भी कम हो सकता है।
2014 चुनाव की प्रमुख बातें
- 10 हजार से ज्यादा वोटर थे औसत एक वार्ड में
- 4 पार्षद ऐसे थे जिनके जीत का अंतर 100 से भी कम था।
- 35 पार्षद ऐसे थे जिनके जीत का अंतर 1000 वोट से कम था।
अब यह होगा गणित
- 7 लाख 15 हजार वोटर हैं वर्तमान में नगर निगम क्षेत्र में
- 160 वार्ड होने पर औसत 4400 वोटर एक वार्ड में हो सकता है।
- वोटिंग प्रतिशत 70 से 80 के बीच रहने पर 3500 वोट एक वार्ड में पड़ते है।
- ऐसे में पार्षद बनने के लिए संघर्ष बढ़ेगा।
- 100 वोट से भी कम जीत अंतर से पार्षद बनने वालों की संख्या बढ़ जाएगी।
जनसंख्या का आधार 10 हजार रखा था
65 से बढ़ाकर 100 वार्ड करने पर एक वार्ड में औसत 10 हजार जनसंख्या को आधार तक पुनर्सीमांकन करना था। लेकिन अब 160 वार्ड में औसत करीब 6 से 7 हजार जनसंख्या को मानकर पुनर्सीमांकन होगा।
छुटटी के दिन भी खुला निगम कार्यालय
जोधपुर नगर निगम का कार्यालय शनिवार को अवकाश के दिन भी खुला। पुनर्सीमांकन और टाउन प्लानिंग विभाग से जुड़े अधिकारी व कर्मचारियों के साथ उपायुक्त कार्यालय में उपस्थित रहे। आयुक्त सुरेश कुमार ओला ने एक आदेश जारी किए थे। इसमें तकनीकी अधिकारी, सहायक नगर नियोजक, ड्राफ्टमैन, कार्यालय अधीक्षक सामान्य एवं जनगणना शाखा को कार्यालय में उपस्थित रहने को कहा। पुनर्सीमांकन के संबंधित कई आंकड़े जयपुर मुख्यालय भेजे गए हैं।