
जोधपुर . राज्य सरकार व प्रशासन की उदासीनता से राजफेड केन्द्र सरकार की ओर से मूंगफ ली की तय लक्ष्य की भी खरीद नहीं कर पाया। पंजीयन में गड़बडिय़ों, बारदान, वेयरहाउस व ट्रांसपोर्ट के अभाव में अधिकतर समय खरीद बंद रही। इससे खरीद प्रक्रिया औपचारिक बनकर रह गई व उत्पादन के मुकाबले मूंगफ ली की मात्र 10 प्रतिशत से भी कम खरीद हो सकी और किसान आक्रोशित हो गए। जैसे ही 8 जनवरी को मूंगफ ली की समर्थन मूल्य पर खरीद बंद हुई। जिले में किसान आंदोलन पर उतारू हो गए। 9 जनवरी को किसानों ने लोहावट में आंदोलन किया और अब गुरुवार को ओसिया में आंदोलन करेंगे।
200 रुपए प्रति क्विंटल भाव गिरे
8 जनवरी को मूंगफ ली की समर्थन मूल्य पर खरीद बंद होते ही बाजार में मूंगफ ली के भाव 200 रुपए प्रति क्विंटल तक गिर गए। इससे मूंगफ ली नीचे में 2800 रुपए प्रति क्विंटल बिकने लगी। किसानों के अनुसार बाजार में मूंगफ ली के भाव बहुत नीचे होने व सरकारी खरीद की आस में किसान अपनी आधी से ज्यादा मूंगफ ली रोके हुए हैं। अब किसानों की आस टूटने लगी तो आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
गत वर्ष भी हुए आंदोलन
प्रदेश में गत वर्ष कृषि विभाग की ओर से मंडी टैक्स में छूट नहीं देने के कारण केन्द्र की अनुमति के बावजूद मूंगफ ली सहित विभिन्न फ सलों की खरीद नहीं हुई थी। इसके बाद प्रदेशभर में किसान संघ के बैनर तले जून में 5 दिन तक आंदोलन किया गया था। दबाव में सरकार ने इस बार मंडी टैक्स माफ कर तिलहन व दलहन फ सलों की खरीद शुरू की।
पत्रिका ने किया था ध्यानाकर्षण
राजस्थान पत्रिका ने भी इस मुद्दे पर समय-समय पर खबरें प्रकाशित की है। इस मुद्दे पर गत २४ दिसम्बर को ही 'केन्द्रीय कृषि मंत्री का आश्वासन भी शुरू नहीं करवा पाया पुन: पंजीयनÓ खबर प्रकाशित कर किसानों के दर्द व सरकार की हठधर्मिता को उजागर किया था।
राज्य सरकार को किसानों की मूंगफ ली खरीद धीमी गति व अपर्याप्त मात्रा में होने से किसानों की समस्या से बार-बार अवगत करवाया लेकिन केंद्र सरकार को समय पर खरीद अवधि व लक्ष्य बढ़ाने का प्रस्ताव नही भेजा। जिससे 8 जनवरी को खरीद बंद होते ही 200 रुपए क्विंटल तक मूंगफ ली के भाव गिर गए। किसान तीन दिन से अलग-अलग जगह आंदोलन कर रहे है। केन्द्रीय कृषि राज्यमंत्री ने खरीद पुन: चालू करवाने का आश्वासन दिया, फि र भी खरीद चालू नही होती है तो गुरुवार से ओसियां उपखण्ड के बाहर धरने से बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे।
तुलछाराम सिंवर, आंदोलन संयोजक, भारतीय किसान संघ