Rajasthan News: पॉलैंड के वारसा और जोधपुर के जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय का संयुक्त शोध : दूसरे स्थान पर जाल व तीसरे स्थान पर गिलोय हवा को कर रहा शुद्ध
गजेंद्र सिंह दहिया
Rajasthan News: हिंदू मान्यता में पीपल के पेड़ को पवित्र मानते हुए पूजा की जाती है। अब शोध में सामने आया है कि पीपल का पेड़ हवा की सफाई करने में नंबर वन है। इसकी पत्तियां हवा में मौजूद कैडमियम, लैड, निकल, कॉपर, आयरन, कार्बन, सिलिकन जैसी धातुओं को अपनी सतह से चिपका लेती हैं। इससे वातावरण की हवा शुद्ध हो जाती है। शोध में हवा को शुद्ध करने में दूसरे स्थान पर जाल व तीसरे स्थान पर गिलोय का पेड़ पाया गया। शोध पॉलैंड की लाइफ साइंसेज यूनिवर्सिटी ऑफ वारसा और जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय ने किया है। शोध वायु प्रदूषण पर विज्ञान पत्रिका एनवायरमेंटल साइंस एंड पॉल्यूशन रिसर्च ने प्रकाशित किया है। अब भारत की विज्ञान पत्रिका करंट साइंस ने इसे प्रॉब्लम सोल्विंग रिसर्च के तौर पर छापा है।
व्यास विवि के प्रोफेसर डॉ. ज्ञान सिंह शेखावत और वारसा विवि के डॉ. रॉबर्ट पोपेक ने शोध के लिए जोधपुर का चयन किया। यहां अधिक वायु प्रदूषण रहता है। इसका कारण पार्टिकुलेट मैटर यानी हवा में मौजूद छोटे कण हैं। जोधपुर के सर्वाधिक प्रदूषित, मध्यम प्रदूषित, कम प्रदूषित और हरियाली वाले 35 इलाकों से 10 पेड़ों की पत्तियों के नमूने लिए गए। जाल, गिलोय आदि की पत्तियां भी ली।
पेड़ों की पत्तियां अपनी सतह पर मौजूद प्राकृतिक मोम के कारण हवा में तैर रहे भारी धातु कणों को चिपका लेती हैं। पीपल पर सर्वाधिक मोम होता है, जिससे धातुकण चिपक जाते हैं और बारिश के मौसम में पानी के साथ बहकर जमीन पर आ जाते हैं, जबकि अन्य पेड़ों पर मोम कम होने से हवा के कारण धातुएं फिर से उड़ जाती हैं। जोधपुर में कैडमियम व लैड अधिक मिला।
दूसरे पेड़ों पर मोम कम होने से धातु कण वापस हवा में उड़ जाते हैं, जबकि पीपल उन्हें बांधे रखता है। इससे पीपल के आस-पास की हवा में भारी तत्व नहीं रहते हैं।
पीपल की पत्तियां न केवल ऑक्सीजन छोड़कर हवा शुद्ध करती है बल्कि हवा में मौजूद हानिकारक भारी धातुओं को अपनी सतह पर चिपकाकर हवा की सफाई भी करती हैं।