
विकास चौधरी/जोधपुर. गौरव यात्रा के दौरान पीपाड़ शहर में मुख्यमंत्री के रथ पर पथराव और सभास्थल पर कुर्सियां फेंकने के पीछे भले ही पंचायत भवन को रियां स्थानान्तरित करने की नाराजगी या अन्य कोई कारण रहा हो, लेकिन पुलिस के स्तर पर भी कुछ कमियां भारी पड़ी। पीपाड़ शहर थाने में पिछले दो-तीन महीने से थानाधिकारी का पद रिक्त है। इस अवधि में पुलिस के तीन अधिकारियों को मौखिक आदेश पर अस्थाई तौर पर थानाधिकारी लगाया जा चुका है, लेकिन स्थाई अधिकारी कोई नहीं रहा। यदि स्थाई थानाधिकारी होता तो कस्बे के लोगों व पुलिस में सामंजस्य रहता और संभवत: मुख्यमंत्री के रथ पर पथराव की नौबत भी नहीं आती।
यहां पुलिस निरीक्षक किशनलाल विश्नोई का स्थानान्तरण जून में बाड़मेर कर दिया गया था। संवेदनशील क्षेत्र होने के बावजूद यहां किसी को थानाधिकारी नहीं लगाया गया। द्वितीय जांच अधिकारी के पास अतिरिक्त कार्यभार था। कानून-व्यवस्था बिगडऩे की स्थिति में पुलिस अधीक्षक कार्यालय में पदस्थापित पुलिस निरीक्षक मदनलाल रॉयल को जिम्मा सौंपा गया था। इसके बाद गौरव यात्रा के मद्देनजर पुलिस निरीक्षक निरंजन प्रताप सिंह को भी अस्थाई तौर पर पीपाड़ शहर थानाधिकारी का प्रभार सौंपा गया। उन्हें अब निर्वाचन विभाग के प्रशिक्षण कार्यक्रम में भेज दिया गया है। अब निरीक्षक चंपाराम को मौखिक आदेश पर थानाधिकारी लगाया गया है। इस संबंध में भी अभी तक लिखित आदेश जारी नहीं हुए हैं।
इनका कहना है
पुलिस निरीक्षक किशनलाल के बाद मदनलाल को एसएचओ लगाया गया था। फिर निरंजन प्रताप सिंह थाना प्रभारी रहे। सिंह के प्रशिक्षण में जाने के कारण अब चंपाराम को भेजा गया है। इन सभी के संबंध में आदेश निकाले गए थे।
- राजन दुष्यंत, पुलिस अधीक्षक,जोधपुर ग्रामीण
सुरक्षा में काफिला पहुंचा था जोधपुर
उग्र माहौल को कुछ काबू करने के बाद मुख्यमंत्री वसुंधरा को सुरक्षा घेरे में लेकर रथ से कार में बैठाया गया था। इसके बाद रात में उनका काफिला तेज रफ्तार में जोधपुर शहर के लिए रवाना हो गया था। हालात संभालने के लिए मौके पर देर रात तक पुलिस तैनात रही। पुलिस ने अब उग्र प्रदर्शन करने वालों की तलाश शुरू कर दी थी।