
विकास चौधरी/जोधपुर. जिले में सक्रिय क्रिप्टो करंसी बिट कॉइन लूटने वाली गैंग के लोग वाट्सएप के जरिए एक-दूसरे से सम्पर्क में हैं। इंटरनेट के जरिये कॉलिंग होने के कारण वाट्सएप पर बातचीत करने वालों के नंबर, लोकेशन ट्रेस नहीं हो पाती। यही वजह है कि पुलिस गत 2 जुलाई को जलजोग चौराहे के पास बैंक कर्मचारी और गत 11 अक्टूबर को मेडिकल कॉलेज के पास सॉफ्टवेयर इंजीनियर का अपहरण कर बिट कॉइन, पचास हजार रुपए, सोने की अंगूठी व चेन लूट की वारदात के मुख्य आरोपी पकड़ में नहीं आ सके हैं।
पुलिस के अनुसार गिरोह में शामिल बदमाश, बिट कॉइन में निवेशकर्ता और तकनीकी विशेषज्ञ वाट्सएप (इंटरनेट कॉलिंग) से ही बातचीत करते हैं। यही वजह है कि मोबाइल लोकेशन पर निर्भर रहने वाली पुलिस इन तक पहुंच नहीं पाई। गौरतलब है कि रंगदारी के लिए धनाढ्य लोगों के मकान पर फायरिंग कर दहशत फैलाने वाली लॉरेंस विश्नोई गैंग भी इंटरेनट कॉलिंग का उपयोग कर रही थी। हालांकि यह गैंग लम्बे समय बाद पकड़ में आ गई थी।
आठ गिरफ्तार, एक दर्जन वांछित
गत 2 जुलाई को बैंक कर्मचारी रवि गहलोत के अपहरण व बिट कॉइन लूट में उमरलाई निवासी पर्बतसिंह, पिण्डारन निवासी पर्बतसिंह, भवाद निवासी सहीराम, हेमसिंह, भोमसिंह, छोटूसिंह शामिल थे। इनमें से कुछ आरोपी सॉफ्टवेयर इंजीनियर से लूट के मामले में भी शामिल हैं और फरार भी चल रहे हैं। पहली वारदात के बाद ही इन्हें पकड़ लिया जाता तो दूसरी वारदात नहीं होती।
कार जब्त, दो और आरोपी जेल भेजे
सॉफ्टवेयर इंजीनियर के अपहरण व लूट के मामले में रिमाण्ड पर चल रहे पर्बतसिंह व अनिल खिलेरी को शनिवार को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया। नरपतसिंह व विक्रम मेघवाल रिमाण्ड पर हैं। विक्रम की निशानदेही से वारदात में प्रयुक्त कार जब्त की गई है।