
जोधपुर. नवीनतम कृषि तकनीक के इस्तेमाल से देश में अनार का उत्पादन बढा है। इसमें निर्यात की काफ ी संभावना है। शोलापुर में लाल अनार की किस्म विकसित की गई है। इसका रंग, आकार तो अच्छा है ही, पौष्टिकता से भरपूर है। यह प्रसंस्करण के लिए बहुत अच्छा है और शराब बनाने में भी इसका उपयोग हो रहा है।
अरब देशों, ब्रिटेन, नेपाल, थाईलैण्ड, रूस, अमरीका में निर्यात हो रहा है। काजरी में निर्यात के लिए अनार उत्पादन मॉडल प्रोजेक्ट के तहत एक दिवसीय कार्यशाला में मुख्य अतिथि राष्ट्रीय अनार अनुसंधान केन्द्र, सोलापुर की निदेशक डॉ. ज्योत्सना शर्मा ने यह जानकारी दी।
नाबार्ड की ओर से वित्तपोषित कार्यशाला में काजरी निदेशक डॉ. ओपी यादव ने कहा कि अनार का अधिक उत्पादन होने से इसमें प्रसंस्करण की आवश्यकता है ताकि किसान की आमदनी बढ़ सके। परियोजना अन्वेषक डॉ. अकथसिंह ने बताया कि परियोजना के तहत निर्यातन्मुख हाइटेक अनार उत्पादन मॉडल के विकास के लिए शोध जारी है। बरसात के पानी से अनार की उपज लेना और सेंसर से ग्रेडिंग करके निर्यात योग्य फसल तैयार करने का मॉडल बनाया जा रहा है। प्रधान वैज्ञानिक डॉ. पीआर मेघवाल और डॉ पी. सान्तरा ने भी विचार रखे।