
रणवीर चौधरी/जोधपुर. शहर में सीवरेज लाइन व नालों में तकनीकी खामियों के कारण जरा सी बारिश से सडक़ें तालाब बन जाती हैं। बारिश होते ही कलक्ट्रेट परिसर से हाईकोर्ट रोड तक पानी भरने के कारण शहर दो हिस्सों में बंट जाता है। बारिश थमने के घंटों बाद यातायात सुचारू हो पाता है। इसकी वजह यह है कि हाईकोर्ट रोड पर सीवरेज लाइन, डिवाइडर, फुटपाथ निर्माण के समय पानी की निकासी का ध्यान नहीं रखा गया। दूसरी तरफ कई वर्षों तक एमडीएम अस्पताल में बारिश के दौरान पानी भरने की समस्या का समाधान तलाशा तो महज अतिक्रमण में दबी सीवरेज लाइन की सफाई करते ही समस्या हल हो गई।
समस्या नं. 1 : 90 डिग्री एंगल पर मिलती है दो सीवरेज लाइन
बारिश के दौरान किला रोड, नागोरी गेट का पानी दो सीवरेज लाइन से पावटा चौराहा तक ढलान के कारण काफी वेग से आता है। यहां मुख्य सीवरेज लाइन का पानी दूसरी लाइन में जाता है। लेकिन तेज वेग और 90 डिग्री एंगल के कारण दूसरी लाइन का पानी मुख्य सीवरेज लाइन में नहीं मिल पाता और सीवरेज लाइन चैम्बर के ढक्कन से निकल पानी सडक़ पर जमा हो जाता है।
समाधान:सीवरेज लाइन को मुख्य लाइन से 90 डिग्री के एंगल की जगह घुमाव देकर जोड़ा जाता तो पानी मुख्य नाले में बहकर आगे निकल जाता।
समस्या नं. 2 : डेढ़ फीट ऊंचा डिवाइडर, रोड के दोनों तरफ दीवार
हाईकोर्ट रोड पर पावटा चौराहा तक डिवाइडर करीब डेढ़ फीट ऊंचा है। रोड के एक तरफ कलक्ट्रेट परिसर और दूसरी तरफ रेलवे लाइन की दीवार है। कलक्ट्रेट परिसर के दूसरी तरफ दीवार और बीच में डिवाइडर होने के कारण सडक़ के दोनों तरफ पानी जमा हो जाता है। डिवाइडर के निर्माण के समय पानी की निकासी का प्रावधान नहीं किया गया। बारिश के बाद पानी की निकासी के लिए कई जगह से डिवाइडर तोड़ा गया।
समाधान :डिवाइडर और दीवार से पानी की निकासी की जगह बनानी चाहिए। इसके साथ ही पानी के पाइप की समय-समय पर सफाई हो ताकि वे ब्लॉक न हों। रोड की सफाई के दौरान प्लास्टिक के कचरे का विशेष ध्यान रखा जाए।
समस्या नं. 3 : फुटपाथ के ऊपर लगाए पानी की निकासी के पाइप
कलक्ट्रेट परिसर और पावटा चौराहा पर जमा पानी रेलवे लाइन की दीवार पर लगे पाइप से नाले में मिलता है। लेकिन दीवार के पास करीब एक फीट ऊंचाई पर फुटपाथ बना है। पानी निकासी के पाइप फुटपाथ के ऊपर होने के कारण पानी की निकासी में एक से दो घंटे लग जाते हैं। इस तकनीकी खामी का पता लगने के बाद कई जगहों से फुटपाथ और दीवार को तोड़ पानी के निकासी की जगह बनाई गई। कई जगह पर पाइप कचरे से ब्लॉक हैं।
समाधान:पानी की निकासी के पाइप रोड के बराबर लगाए जाएं ताकि पानी जल्दी निकल पाए। निकासी की जगह बड़े पाइप हों ताकि वे मिट्टी व कचरे से ब्लॉक न हों। उनकी समय-समय पर सफाई हो।
(पत्रिका एक्सपर्ट : राजेंद्र पुरोहित, सेवानिवृत अधिशासी अभियंता, यूआइटी )
इन 2 उदाहरणों से समझें बड़ी समस्याओं के छोटे-छोटे समाधान
1. सालों की परेशानी छोटी सी खामी दूर करने से हल हो गई
हर वर्ष बारिश के दौरान मथुरादास माथुर अस्पताल परिसर में पानी भरने की समस्या के समाधान के लिए नगर निगम, जिला प्रशासन व अस्पताल प्रशासन की गत जून माह में बैठक हुई। संभागीय आयुक्त बीएल कोठारी ने बताया कि अस्पताल परिसर के आस-पास सीवरेज लाइन व नालों का सर्वे किया तो पता लगा कि अस्पताल के मुख्य गेट के पास मेडिकल दुकानों से निकलने वाले नाले पर अतिक्रमण करने के कारण सफाई नहीं हो सकी। नाला ब्लॉक था। इस पर नाले के ऊपर से अतिक्रमण हटाकर नाले की सफाई करवाई गई। साथ ही मेडिकल चौराहा और एमडीएम अस्पताल परिसर के पीछे से निकलने वाले नाले की एयरफोर्स तक सफाई करवाई गई। इससे अस्पताल परिसर में पानी भरने की समस्या खत्म हो गई।
2. जमीन का लेवल एक समान होने पर नहीं भरेगा पानी
एमडीएम अस्पताल में अब कुछेक जगह ही पानी भरने की समस्या है। लेकिन यह पानी अन्य क्षेत्रों से आता है। एमडीएम अस्पताल अधीक्षक डॉ. महेंद्र कुमार आसेरी ने बताया कि जनाना विंग, धर्मशाला के पास, मुख्य गेट पर जमीन का स्तर नीचे होने के कारण पानी भरता है। इसके लिए जल्द ही जमीन का लेवल एक समान किया जाएगा, ताकि अगले वर्ष बारिश के दौरान अस्पताल परिसर में कहीं भी पानी जमा न हो।