
अमित दवे/जोधपुर. वैश्विक बाजार में एक तरफ भारत अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। वहीं हैण्डीक्राफ्ट क्षेत्र में शोध व विकास (आर एण्ड डी) में निवेश नहीं होने के कारण हैण्डीक्राफ्ट्स के कई क्षेत्रों में विएतनाम, मलेशिया, बांग्लादेश जैसे देश वैश्विक बाजार में भारत को पीछे छोड़ रहे हैं। इसकी वजह भारतीय हैण्डीक्राफ्ट उद्योग में शोध व विकास (आर एण्ड डी) कार्यो में खर्च को लेकर उदासीनता है। लकड़ी के हैण्डीक्राफ्ट फर्नीचर निर्यात में जोधपुर देश में पहले स्थान पर है, लेकिन इस क्षेत्र में शोध व विकास की कमी से हैण्डीक्राफ्ट उत्पादों में नई डिजाइन नहीं मिल रही है। उत्पादों में परम्परागत प्रचलित डिजाइन से जोधपुर प्रतिस्पर्धा में पिछड़ रहा है। साथ ही, नए ऑर्डर नहीं मिलने से उत्पादन में गिरावट आ रही है और बेरोजगारी भी बढ़ रही है।
रिसर्च पर निवेश कम
वर्ष 2018 के आर्थिक सर्वे के अनुसार बीते दो दशक से आर एण्ड डी मद पर होने वाले खर्च सकल घरेलू अनुपात के 0.6-0.7 फ ीसदी पर अटका हुआ है । इस मामले में अमरीका, चीन व इजरायल जैसे देश भारत से बहुत आगे हंै। आर्थिक सर्वे के मुताबिक देश में इस मद पर होने वाले खर्च का प्राथमिक स्त्रोत सरकारी फ ंडिंग ही है। निजी क्षेत्र इस मामले में बहुत पीछे है। हैण्डीक्राफ्ट्स निर्यात में भारत अब ताइवान, चीन, विएतनाम व इंडोनेशिया जैसे देशों से भी पिछड़ रहा है। इसकी बड़ी वजह यह है कि यह देश अपने यहां आर एण्ड डी पर ज्यादा निवेश कर रहे हैं। उनके उत्पाद या ब्रांड वैश्विक बाजारों में भारत से ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो गए हैं, इंडोनेशिया, विएतनाम व ताइवान जैसे छोटे देशों में हैण्डीक्राफ्ट फ र्नीचर निर्यात उत्पादन के लिहाज से भारत के निर्यातकों से तीन गुना ज्यादा उत्पादन क्षमता रखते है ।
आरएंडडी पर बढाए खर्च
बिना आरएंडडी पर खर्च बढ़ाए अब वैश्विक बाजारो में प्रतिस्पर्धा करना भारतीय निर्यातकों के लिए मुश्किल होगा। अगर सरकार आर एण्ड डी पर होने वाले खर्च पर उद्योगों को टैक्स छूट देती है तो इसमें निवेश बढेगा। इसका लाभ उत्पादों की लागत कम करने से लेकर उन्हे वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाने में होगा। इस संबंध में वाणिज्य एवं कपडा मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा है ।
डॉ भरत दिनेश, अध्यक्ष, जोधपुर हैण्डीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन
दे रहे हैं जानकारी
कार्यशालाओं व सेमिनार के माध्यम से हस्तशिल्पियों को निर्यात उद्योग के वैश्विक परिदृश्य के लिहाज से हस्तशिल्प उत्पादों की नई डिजाइन की जानकारी दी जा रही है। आर एण्ड डी स्कीम में ज्यादा से ज्यादा हस्तशिल्पियों, निर्यातकों को जानकारी देने का प्रयास रहेगा।
किरण वीएन, सहायक निदेशक, विकास आयुक्त हस्तशिल्प कार्यालय, जोधपुर