
अभिषेक बिस्सा/जोधपुर. विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद नगर निगम के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती स्वच्छता सर्वेक्षण-2019 में रैंकिंग सुधारना है। जोधपुर नगर निगम स्वच्छता सर्वेक्षण-2019 की डॉक्यूमेंटेशन की औपचारिकताओं को तो पूरी कर रहा है, लेकिन प्रेक्टिकल कार्यों में पिछड़ रहा है। नगर निगम ने इस बार कामकाज का ब्यौरा मय दस्तावेज ऑनलाइन अपडेट कर दिया है। निगम को शहर में सफाई व्यवस्था को सुढृढ़ करने के लिए फिल्मी व क्रिकेट सितारों के साथ 20 गुणा 22 के होर्डिंग लगाने थे। लेकिन ये होर्डिंग अब तक कहीं नहीं लगे हैं। इसके अलावा हर रोज सौ किलो कचरा तैयार रखने वाले होटलों के बाहर कचरा कंपोजिट करने के प्लांट लगाने थे, जो भी अब तक कहीं नहीं लगे हैं। केरू में भी कंपोजिट संबंधित ऐसे कोई विशेष प्लांट नहीं है। जो नॉम्र्स पर खरे उतर पाए। सूखे व गीले कचरे के मामले में भी निगम फेल होता जा रहा है। बताया ये भी जा रहा है कि शहरों को बिन लेस यानी डस्टबिन रहित बनाना है। इसका मतलब घरों में डस्टबिन रहे, सडक़ पर नहीं। ऐसा भी अब तक नहीं हो पा रहा है। जबकि निगम ने उल्टे डस्टबिन लगाने पर करोड़ों रुपए खर्च किए हंै। सूत्र बता रहे हैं कि निगम को केन्द्र सरकार ने 16-17 करोड़ रुपए स्कूल, कॉलेज में जनजागरुकता के लिए खर्च करने को दिए थे, जो राशि भी निगम ने खर्च नहीं की। इस कारण निगम को गत कई वर्षों से केन्द्र सरकार से बजट तक नहीं मिला।
ये बिंदु होंगे खास
-डोर टू डोर कचरा संग्रहण की स्थिति
-बाजारों में डस्टबिन की स्थिति
-गीला या सूखा कचरा अलग उठा रहे हैं या नहीं
- कचरे से खाद बनाने का काम किया या नहीं
- स्वच्छता के प्रति लोगों के व्यवहार में परिवर्तन कितना
टीम करेगी अचानक निरीक्षण
नई दिल्ली से आने वाली टीम का अब तक हर सर्वेक्षण का शिड्यूल तय होता था, लेकिन इस बार टीम अचानक आएगी। टीम के आने की जानकारी अधिकारियों के पास नहीं रहेगी। टीम शहर में ओडीएफ, डोर टू डोर कचरा संग्रहण, बस स्टैंड, रेलवे, सार्वजनिक स्थानों की साफ-सफाई आदि देखेगी और फिर रिपोर्ट तैयार करेगी। टीम आम जनता से भी शहर की स्थिति पूछेगी।
इनका कहना
वेबसाइट पर अपलोड करने संबंधी सभी कार्य पूरे कर लिए गए हैं। सभी काम चल रहे हैं। पोस्टर लगाने का कार्य अब शुरू होगा। आचार संहिता में पोस्टर लग नहीं सकते थे। अब काम शुरू होगा।
- दुर्गेश बिस्सा, आयुक्त, नगर निगम