
जोधपुर
राजस्थान हाईकोर्ट ने जैसलमेर जिले में पालीवालों के विश्व प्रसिद्ध संरक्षित गांव कुलधारा के स्मारकों में बदलाव करने और वहां दिल्ली व मुंबई के स्वयंसेवी संगठनों के माध्यम से व्यवसायिक गतिविधियां शुरू करने पर रोक लगाने के आदेश दिए हैं।
जस्टिस संगीत लोढा और दिनेश मेहता की खंडपीठ ने सुनील पालीवाल की ओर से दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किए।
खण्डपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 13 दिसम्बर को निर्धारित करते हुए पुरातत्व और संग्रहालय विभाग के निदेशक, गवर्नमेंट म्यूजियम (जैसलमेर) के क्यूरेटर को व्यक्तिगत तौर पर उपस्थित रहने के आदेश दिए हैं।
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि विश्व प्रसिद्ध संरक्षित गांव कुलधारा में सरकार कुछ निजी एनजीओ के माध्यम से संरक्षित मॉन्यूमेंट्स के साथ छेड़छाड़ कर रही है और पर्यटक टेंट लगा वहां के पर्यावरण को दूषित करने की योजना बना रही है।
याचिका में राज्य के प्रधान सचिव (पर्यटन, कला और संस्कृति), निदेशक पुरातत्व संग्रहालय (एल्बर्ट हॉल जयपुर), इसी विभाग के उपनिदेशक, अधीक्षक, जैसलमेर स्थित राजकीय संग्रहालय के क्यूरेटर, नई दिल्ली व मुंबई स्थित जेएसडब्ल्यू फाउंडेशन, राजवेस्ट पॉवर लिमिटेड और आभा नारायण लांबा एसोसिएट्स (दोनों मुंबई) और जिला कलक्टर के माध्यम से जैसलमेर विकास समिति आदि को पक्षकार बनाया गया है।
सरकार की ओर से एएजी राजेश पंवार ने और जेएसडब्ल्यू फाउंडेशन की ओर से डॉ. सचिन आचार्य ने पैरवी की।