
जोधपुर।
देश में ईसब का उत्पादन पिछले वर्ष के मुकाबले इस बार करीब 2 लाख बोरी कम हुआ है। उत्पादन कम व मांग ज्यादा होने के कारण भावों में तेजी बनी हुई है। इसके बावजूद निर्यात के लिए विदेशी मांग लगातार बढ रही है। पिछले साल जहां इस समय ईसब के भाव 90 रुपए प्रति किलो थे, वहीं अभी ईसब के भाव करीब 120 रुपए प्रति किलो है। इस वर्ष ईसब की बिंजाई कम होने व मौसम की प्रतिकूलता के कारण फसल अच्छी नहीं हुई व उत्पादन कम हुआ है। देश से ईसब अमरीका सहित 20 से अधिक देशों में ईसब निर्यात हो रहा है। अमरीका की प्रोक्टर एण्ड गेम्बल (पी एण्ड जी ) कंपनी भारतीय ईसब की सबसे बड़ी खरीदार है।
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ईसबगोल एक नजर में
- 200 करोड़ का निर्यात होता है हर साल
- 90 फीसदी उत्पादन होता है राजस्थान में
- 8 किलो प्रति हेक्टेयर में होता है उत्पादन
- 10 से ज्यादा रोगों में है फायदेमंद
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देश से बढ़ रहा है निर्यात (कंटेनर्स में)
माह ---- 2019-20------ 2020-21 (अगस्त 2020 तक )
अप्रेल-- 179-- 95
मई- 203-- 198
जून- 155-- 244
जुलाई- 190-- 223
अगस्त- 167-- 185
सितम्बर- 181--00
अक्टूबर- 141-- 00
नवम्बर- 122-- 00
दिसम्बर- 193-- 00
जनवरी- 168--00
फरवरी- 193--00
मार्च- 190--00
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कुल-- 2082----- 945
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इस वर्ष उत्पादन कम होने के साथ व्यापारियों के पास पुराना स्टॉक नहीं है। डिमांड और सप्लाई के बीच में 4 से 5 लाख बोरी ईसबगोल की शॉर्टेज बन सकती है। डिमांड को देखते हुए आने वाले दिनों में इसब के भाव में अच्छी वृद्धि देखने को मिल सकती है।
पुरुषोत्तम मूंदड़ा, अध्यक्ष
जोधपुर जीरा मंड़ी व्यापार संघ
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सरकार की ओर से पूर्व में 40 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती थी, लेकिन अब वह बंद कर दी गई है। सरकार वापस सब्सिडी देना शुरू करे, तो इकाइयों में वृद्धि होगी और व्यापार बढ़ेगा। जगदीशप्रसाद सोनी, प्रोसेस इकाई संचालक
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