
जोधपुर. शहर का नाम सिर्फ खान-पान एवं अपणायत के लिए ही मशहूर नहीं है। यहां की धरती से ऐसी कई प्रतिभाएं निकली हैं जिन्होंने देश एवं दुनिया में शहर का नाम रोशन किया है। ऐसी प्रतिभाएं न सिर्फ राजनीति, बिजनेस, सिंगिंग बल्कि खेल में भी अपना दमखम दिखा रही हैं। इसी कड़ी में नाम आता है बॉक्सिंग का। जिसमें यहां की प्रतिभाएं न सिर्फ सफलता अर्जित कर रही हैं बल्कि नेशनल लेवल पर भी सफलता का पंच लगाने के लिए युवा प्रतिभाएं तैयार हैं। बॉक्सिंग डे पर ऐसी ही खेल प्रतिभाओं ने पत्रिका प्लस के साथ साक्षा किए अपने विचार।
क्यों मनाया जाता है बॉक्सिंग डे?
वैसे तो क्रिसमस के अगले दिन को बॉक्सिंग डे के रूप में मनाया जाता है, लेकिन इस दिन कई तरह के खेलों का आयोजन भी विभिन्न देशों में किया जाता है। आस्ट्रेलिया में प्रमुख तौर पर क्रिकेट का आयोजन किया जाता है। वहीं विभिन्न अन्य देशों में अलग-अलग प्रकार के खेलों का आयोजन कर प्रतिभाओं को तराशने का कार्य किया जाता है।
ओलंपिक में जीतना है पदक
मैं नियमित तौर पर मुक्केबाजी का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहा हूं। देश के नामी मुक्केबाजों को देश के लिए खेलते देख प्रेरणा सी मिल रही है। मेरा भी लक्ष्य देश के लिए खेलते हुए ओलंपिक में पदक जीतने का है। इसके लिए कड़ी मेहनत भी कर रहा हूं।
विश्वास मलिक
लगातार तीन वर्षों से राज्य स्तर पर स्वर्ण पदक प्राप्त कर चुकी हूं। मेरा लक्ष्य मुक्केबाजी की दुनिया में नाम रोशन करने का है। मेरा सपना एक अच्छा कोच बनने का है। इसके लिए कड़ी मेहनत कर रही हूं। नियमित प्रशिक्षण के माध्यम से लक्ष्य को हासिल करने के प्रति प्रतिबद्ध हूं।
मंजू चौधरी
मैं बचपन से ही मुक्केबाजी की दुनिया में नाम कमाना चाहती थी, इसी वजह से इस खेल को चुना। मैं आगे चलकर इस खेल में जोधपुर का नाम अंतरराष्ट्रीय पटल पर रोशन करना चाहती हूं। सफलता के लिए संघर्ष जरुरी होता है। मेरी आदर्श मैरीकॉम है।
अनु दायमा
मुक्केबाजी की दुनिया में सफल होने के लिए सिर्फ लक्ष्य बनाना ही काफी नहीं होता है, बल्कि कड़ी, मेहनत, लगन व धैर्य के साथ परिश्रम का होना भी आवश्यक है। प्रशिक्षण के माध्यम से यही सब सीख रहा हूं। एक दिन देश के लिए जरुर पदक जीतकर लाउंगा।
वीरेंद्र सिंह
मुक्केबाजी मेरा जुनून है। इसके लिए कड़ी मेहतन कर रही हूं। मैंने हाल ही में सीबीएसई की ओर से हुई प्रतियोगिता में नेशनल लेवल पर कांस्य पदक जीता था। अब कड़ी मेहनत करते हुए इस पदक को राष्ट्रीय स्तर पर देश के नाम जीतने का है।
कामाक्षी आचार्य