
गजेंद्रसिंह दहिया/जोधपुर. राशन की दुकानों पर गरीबों के लिए आ रही चने की दाल के खराब होने की आशंका है। इस महीने की चना दाल प्लास्टिक के कट्टों में आ रही है। जिसमें नमी अधिक होने से कट्टों में ही चने की दाल के लड्डू बन गए हैं। कट्टे सीलन से भरे हुए हैं। दाल में नमी की अधिकतम स्वीकृत मात्रा 14 प्रतिशत है जबकि इसमें 20 से 22 प्रतिशत नमी मिल रही है। राशन डीलर ने भी दाल के सूखने पर इसमें कमी आने और इसकी भरपाई को लेकर विरोध जताया है।
लॉक डाउन के दौरान केंद्र सरकार ने खाद्य सुरक्षा से जुड़े लाभार्थियों को अप्रैल से लेकर जून तक 3 महीने प्रति परिवार 1 किलो चना दाल देने की घोषणा की थी। इसी के तहत नेफेड चना दाल खरीद कर राज्य सरकारों को भेज रही है। जोधपुर में पिछले महीने आई चना दाल में भी नमी अधिक होने की शिकायतें थी। नमी युक्त दाल के भंडारण के पश्चात इसके सूखने पर वजन कम हो जाता है। ऐसे में राशन डीलर सभी उपभोक्ताओं को दाल नहीं दे पा रहे हैं और उपभोक्ताओं के विरोध का सामना अलग से करना पड़ता है।
जूट का कट्टा महंगा, प्लास्टिक का सस्ता
प्लास्टिक का कटा 5-6 रुपए में आता है जबकि जूट के बोरे की कीमत 20-25 रुपए है। जूट में हवा पास होने के कारण दाल के सडऩे का खतरा नहीं रहता है लेकिन प्लास्टिक के कट्टे में दाल के भंडारण के समय ही गीली दाल भरने पर इसमें बदबू आने की आशंका रहती है।
अधिक नमी युक्त आ रही दाल
दाल में नमी की मात्रा अधिक है। हमने ठेकेदार को प्लास्टिक की बजाय जूट के कट्टे उपयोग में लेने को कहा है।
- राजेश पंवार, प्रबंधक, राजस्थान राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम जोधपुर