
जोधपुर. लॉकडाउन के चलते संकट में फंसे होटल उद्योग को सरकार क्वॉरंटीन सेंटर के रूप में काम में लेकर भी संजीवनी दे सकती है। हालांकि कुछ होटलों का इस्तेमाल कोरोना वॉरियर्स को रुकवाने के लिए किया जा रहा है, लेकिन इसकी शर्तों व तय की जाने वाली दरों से होटलों को राहत मिलती नहीं दिखती। अब चूंकि कई प्रवासी घर लौट रहे हैं। विदेशों से भी लोगों को लाने की तैयारी है।
ऐसे में यदि इन लोगों को होटलों में उनके खर्च पर ही क्वॉरंटीन किया जाए तो होटली इंडस्ट्री फिर पटरी पर आ सकती है। इस बारे में जिला प्रशासन ने कवायद भी शुरू की है। शहर की लगभग 50 होटलों ने रूचि दिखाई है। इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का मानना है कि होटलों को यदि इस दौर में लागत भी इससे मिल जाती है तो इस उद्योग को खड़ा होने में सहारा मिल जाएगा। बंद पड़े होटल फिर शुरू हो सकेंगे।
ऐसे मिलेगा लाभ
जिन होटल्स में पेड क्वारंटीन सेंटर्स बनाए जाएंगे वहां दो समय का भोजन, नाश्ता चाय व अन्य ऑन डिमांड व्यवस्था होटल की ओर से की जाएगी। इसकी दरें जिला प्रशासन तय करेगा। इसका भुगतान क्वारंटीन होने वाले व्यक्ति को ही करना होगा। प्रशासन हाई, मीडियम व स्टैंडर्ड श्रेणियों में होटल का चयन कर रहा है। इनमें सुविधाएं व दरें भी अलग-अलग होगी।
राहत तो मिलेगी
शहर में 300 के करीब होटल हैं। इसमें से अभी 50 के करीब होटल को क्वारंटीन सेंटर के रूप में काम में लिया जाएगा। इसके बाद यदि प्रवासियों की संख्या बढ़ती है तो यह संख्या बढ़ाई भी जा सकती है।
यह भी चाह रहे राहत
होटल व्यवसायी पवन मेहता ने बताया कि ऐसे होटल जिन्होंने लाइसेंस रिन्यूअल फीस जमा नहीं करवाई व उनका लिकर का स्टॉक पड़ा है उनको राहत देते हुए सरकार आरएसबीसीएल के जरिये पुन: माल ले। इसके बदले में व्यवसायी राशि नहीं बल्कि आगामी स्टॉक में समायोजन को भी सहमत है। सरकार ने लॉकडाउन खुलने के तीन दिन के अंदर यह राशि जमा करवाने की छूट दी थी।
इनका कहना...
फिलहाल 50 होटल्स में पेड क्वॉरंटीन सेंटर बनाने का विचार है। इनमें क्वॉरंटीन व्यक्ति खुद भुगतान कर रह सकता है। इसकी दरें जल्द जारी की जाएगी।
- अरूण पुरोहित, रजिस्ट्रार, आयुर्वेद यूनिवर्सिटी व नोडल अधिकारी
यह होटल इंडस्ट्री को सहारा देने वाला ही कदम है। कुछ आवेदक होटल्स का चयन कर शुरुआती ट्रेनिंग भी दी गई है।
- डॉ. सरिता, उप निदेशक आरटीडीसी