
जोधपुर. केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी) के निदेशक डॉ ओपी यादव को देश के प्रतिष्ठित रफी अहमद किदवई अवार्ड से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया जाता है। इसमें सम्मान-पत्र और पांच लाख रूपए नकद मिलते हैं।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के शुक्रवार को आयोजित 93वें स्थापना दिवस समारोह में केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने वुर्चअल कार्यक्रम में प्रदान किया। डॉ. यादव एक साधारण कृषक परिवार से आते हैं। डॉ यादव ने काजरी में पौध प्रजनन के साथ अखिल भारतीय समन्वित बाजरा अनुसंधान परियोजना में समन्वयक और भारतीय मक्का अनुसंधान नई दिल्ली में निदेशक के तौर पर कार्य किया है। उन्होंने विगत 30 वर्षो में अपने कार्य को फसलों के आनुवंशिक सुधार के लिए फोकस किया है विशेषकर सूखा प्रभावित क्षेत्रों की फसलों के लिए।
डॉ. यादव ने अपने अनुसंधान स्ट्रेस पर्यावरण में फसलों का अनुकूलन आनुवंशिक विविधीकरण द्वारा विशिष्ट जर्मप्लाज्म का समुचित प्रयोग, आनुवंशिक संसाधन का प्रबन्धन, पारम्परिक एवं नवीन विधियों द्वारा सुखा सहिष्णु, रोग प्रतिरोधी एवं बायोफोर्टिफाइड करने का कार्य किया है । जल की सीमित पारिस्थितिक में फसल के सूचकांक को उच्च दर पर बनाये रखते हुए हिस्टरोसिस के दोहन और तत्वरित पादप वृद्धि की प्राप्ति के माध्यम से अनाज और पशुओं के चारे की पैदावार दोनों में वृद्धि के लिए अनेक परिकल्पनाओं को तैयार करके उनके परीक्षण करने के पश्चात पुष्टि की गई । डॉ. यादव द्वारा फसलों में रोग जन्यता और कृषि संबंधी लक्षणों पर सिट्रो साइटोप्लास्मिक प्रभावों में किये गये अनुसंधान की संकर प्रजनन में अत्यधिक प्रांसगितकता है । उनकी टीम द्वारा किये गये अनुसंधान परिणाम स्वरूप कई व्यावसायिक फसलों को रिलिज किया गया और सूखा सहनशीलता रोग प्रतिरोधक क्षमता के स्त्रोतों की पहचान की गई । जिससे बड़ी संख्या में जर्मप्लाजम और प्रजनन सामग्री सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए पहचानी गई । डॉ. यादव के शोध का तात्कालिक प्रभाव सूखाग्रस्त क्षेत्रों फसल प्रजनन गतिविधियों का पुर्नविन्यासन है । जिसमें आधार सामग्री का प्रजनन और चयन के लिए दृष्टिकोण शामिल है ।