
जोधपुर/ जयपुर। जोधपुर शहर जिला कांग्रेस कमेटी ने बुधवार शाम आवश्यक बैठक कर विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी तय करने का अधिकार पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को दे दिया। बैठक में इस संबंध में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया।
शहर जिलाध्यक्ष सईद अंसारी ने इस प्रस्ताव की प्रति प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी महासचिव व राजस्थान प्रभारी अविनाश पांडे व राष्ट्रीय सचिव व सहप्रभारी राजस्थान विवेक बंसल को भी भेजी है।
बैठक में जिलाध्यक्ष अंसारी ने कहा कि जोधपुर जिला कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी तय करने का अधिकार सदैव पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को दिया है। पीसीसी सदस्य गणपत सिंह चौहान ने प्रस्ताव रखा कि जोधपुर शहर जिला कांग्रेस कमेटी प्रत्याशी चयन संबंधी निर्णय लेने के समस्त अधिकार पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को सौंपती है। इस प्रस्ताव को वहां उपस्थित समस्त कांग्रेसजन ने हाथ खड़े कर पारित किया।
हमारी भावनाएं व्यक्त की: अंसारी
शहर जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष सईद अंसारी ने कहा कि उन्होंने प्रस्ताव की कॉपी पायलट, बंसल व पांडे को भेजी है। साथ ही राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को भी भेज रहे हैं। इसमें हमने अपने कार्यकर्ताओं की भावनाएं बयां की है। बैठक में यह प्रस्ताव ध्वनि मत से पारित किया गया है।
गरमाई हुई है जोधपुर कांग्रेस की सियासत
इस बीच विधानसभा चुनाव आने से पहले प्रत्याशी चयन को लेकर जोधपुर में कांग्रेस खेमे की सियासत गरमाई हुई है। साल 2008 में बिलाड़ा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव हारे कांग्रेस प्रत्याशी शंकरलाल चौहान ने पिछले दिनों जोधपुर पहुंचे प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष सचिन पायलट से मुलाक़ात की थी। चौहान ने उनसे कहा था कि वे 2008 विधानसभा चुनाव में 11 हजार 7 सौ वोटों से हारे थे। 2013 में पार्टी ने जोधपुर जिला कांग्रेस देहात अध्यक्ष हीराराम मेघवाल को टिकट दिया, जो 40 हजार वोटों से हार गए। अब उन्हें टिकट देने की बातें हो रही है। इस पर तुरंत पायलट ने कहा था कि किसने कहा हम टिकट दे रहे हैं, बातें चल रही है तो आप भी चलाओ। इतना कहकर सचिन पायलट आगे बढ़ गए थे।
चौहान ने इस बीच यह भी कहा था कि रिटायर्ड एसपी विजेन्द्र झाला भी नए एंटर हुए है, उन्हें भी टिकट देने की बातें हो रही है। जबकि वे दस साल से पीसीसी सदस्य सेवाएं दे रहे हैं। मैंने भी कांग्रेस के टिकट से चुनाव लड़ा है, अब मैं कहां जाउंगा। अगर 2013 में उन्हें टिकट देते तो वे जीत सकते थे। हालांकि 2013 के चुनाव में हीराराम मेघवाल 35 हजार 9 सौ 41 वोटों से हारे थे।
वहीं 2008 के चुनाव में शंकरलाल 14 हजार 8 सौ 63 वोटों से हारे थे। इन सभी बातों को चलते-चलते सुन पायलट आगे बढ़ गए थे।