
विशाल सूर्यकांत
सरदारपुरा। Rajasthan Election 2018- राजस्थान की नजरें विधानसभा क्षेत्र संख्या-127 पर टिकी हुई है। ये है राजस्थान की हॉट सीट - सरदारपुरा। पूर्व मुख्यमंत्री और एआइसीसी के राष्ट्रीय महासचिव अशोक गहलोत का ये निर्वाचन क्षेत्र 2013 में जोधपुर जिले की इकलौती विधानसभा सीट थी, जो वापस कांग्रेस के खाते में आई। ये लगभग तय था कि आलाकमान राजस्थान में अशोक गहलोत को चुनाव लडऩे की इजाजत देगा तो उनकी विधानसभा सीट सरदारपुरा ही होगी।
यूं तो मारवाड़ की सभी सीटों पर गहलोत फैक्टर का असर रहता है, अलबत्ता जोधपुर शहर और सूरसागर ये दो सीटें ऐसी है जहां कांग्रेस कभी कभार ही जीत पाती है। बहरहाल, सरदारपुरा विधानसभा क्षेत्र में मंडोर के अलावा जोधपुर शहर का भी काफी हिस्सा है। सरदारपुरा इलाका जिस पर इस सीट का नाम है वह परिसीमन के बाद सूरसागर सीट में जा चुका है।
2013 के चुनाव परिणामों के बाद कांग्रेस ने इस बार जोधपुर जिले की दस में से सात सीटों पर नए चेहरे उतार दिए हैं। जोधपुर और सूरसागर विधानसभा सीटों में भाजपा की किलेबंदी पिछले कई चुनावों में टूटी नहीं। खुद पूर्व मुख्यमंत्री अपनी सभाओं में सार्वजनिक रूप से इन दो सीटों को लेकर अपना दर्द जाहिर कर चुके हैं। मारवाड़ की उपेक्षा को इस बार पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने भाषणों में बड़ा मुद्दा बना रखा है।
सरदारपुरा से कुल 17 उम्मीदवार हैं, जिनमें दस निर्दलीय हैं। अपने नामांकन के बाद शुरू में चार दिन तक अपने चुनाव क्षेत्र में प्रचार करने के बाद अशोक गहलोत पूरे सूबे में कांग्रेस के प्रचार के लिए निकल गए। राहुल गांधी की सभा के बाद जितना वक्त रुके गहलोत ने सरदारपुरा विधानसभा सीट पर प्रचार किया। वहीं बीजेपी प्रत्याशी शंभूसिंह खेतासर भी एड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए हैं। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ जोधपुर की सभा के मंच पर भी नजर आए।
सरदारपुरा क्षेत्र में जनता के मुद्दे जानने के लिए हम के.सी.लोन क्षेत्र में पहुंचे। जहां स्थानीय निवासी गजेन्द्र मेहता मिले। उनके मुताबिक इस बार उनका मुद्दा है कि दिखावा नहीं चाहिए, काम करने वाली सरकार चाहिए। ललित जैन कहते हैं कि अगर बाड़मेर में समय पर रिफाइनरी शुरू हो जाती तो जोधपुर समेत पूरे मारवाड़ को इसका फायदा मिलता। कांग्रेस समर्थक जगदीश कड़वासरा के मुताबिक कांग्रेस के वक्त में ही काम हुए हैं।
अशोक गहलोत ने दो बार मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री रहते हुए जोधपुर में विकास के कई काम कराए। आइआइटी, आयुर्वेद विश्विविद्यालय, एम्स, एनएलयू समेत कई संस्थान ले कर आए। इसके विपरीत जोधपुर को केंद एवं राज्य भाजपा सरकार से शिकायत है कि प्रदेश के दूसरे नंबर के शहर जोधपुर को स्मार्ट सिटी की सूची तक में नहीं रखा गया। दूसरी ओर बीजेपी के शहर अध्यक्ष देवेन्द्र जोशी ने जोधपुर को स्मार्ट सिटी का दर्जा नहीं मिलने के मुद्दे पर कहा कि स्मार्ट सिटी के कई पैरामीटर्स होते हैं। पिछली बार नहीं आया तो इस बार आ जाएगा। राजनाथ सिंह, सुषमा स्वराज और पूर्व वित्त मंत्री जसवंत सिंह के कार्यकाल में यहां एम्स आया। हमारे कार्यकाल में सुरपुरा बांध में मॉर्डन टेक्नोलॉजी का पूरा रोडमैप बना है।
किसकी क्या ताकत
अशोक गहलोत
ताकत: कांग्रेस के कद्दावर नेता, क्षेत्र से लगातार चार बार विधायक, दो बार मुख्यमंत्री रहे, राष्ट्रीय स्तर के नेता के रूप में पहचान, जातिगत वोट बैंक
कमजोरी: प्रदेश में प्रचार की जिम्मेदारी से सरदारपुरा में प्रचार के लिए समय कम, राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी से क्षेत्र में समय कम दे पाना।
शंभूसिंह खेतासर
ताकत: पिछला चुनाव हारने के बावजूद भाजपा ने बीज निगम का अध्यक्ष बना केबिनेट मंत्री का दर्जा दिया, क्षेत्र में सक्रिय रहे, जातिगत वोट बैंक
कमजोरी: मुकाबले में मजबूत और राष्ट्रीय कद का नेता, क्षेत्र से भाजपा के लगातार चार बार हारने से पार्टी की कमजोर स्थिति
सरदारपुरा क्षेत्र की समस्याएं
राजनीतिक रूप से जागरूक इस विधानसभा क्षेत्र में बुनियादी मुद्दे भी कम नहीं। साफ-सफाई नहीं होना, अवैध बस्तियां, सडक़ों की मरम्मत, एक और कॉलेज की जरुरत, नागादड़ी से सुरपुरा बांध तक आने वाली नहर की समस्या,पानी निकासी जैसे मुद्दे यहां सामान्य जनजीवन की समस्याओं की सूची में शुमार है। गहलोत इन समस्याओं पर सीधे सरकार पर आरोप लगाते हैं कि चूंकि ये उनका क्षेत्र है इसीलिए वसुन्धरा राजे सरकार ने यहां विकास के काम नहीं करवाए।
राजनीतिक बिसात पर फिर वही मोहरे
कांग्रेस के उम्मीदवार गहलोत के सामने भाजपा ने अपने 2013 के उम्मीदवार शंभूसिंह खेतासर को ही चुनावी मैदान में उतारा है। शंभूसिंह खेतासर को उस चुनाव में हार के बावजूद कद बढ़ाते हुए बीजेपी ने न सिर्फ बीज निगम का अध्यक्ष बनाया, बल्कि केबिनेट मंत्री का दर्जा भी दिया। वे मारवाड़ की उपेक्षा के आरोपों को नकारते हुए कहते हैं कि पहले उनके लिए ये क्षेत्र नया था, अब पांच साल में अच्छे से जान चुके हैं कि सरदारपुरा की जनता क्या चाहती है, विकास के कौन से काम करवाने हैं। वे पांच साल जनता के बीच रहे हैं। वे आरोप लगाते हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश की विधानसभा में कोई मुद्दा नहीं उठाया।
एम्स का श्रेय लेने की होड़
जोधपुर के कई कार्यों की कांग्रेस और भाजपा में श्रेय लेने की होड़ है। इन कार्यों को लेकर ये दल अपने-अपने दावे कर कर रहे हैं। जोधपुर में एम्स लाने पर भी दोनों दल दावे कर रहे हैं। कांग्रेस जहां इसे अपनी उपलब्धी बता रही है वहीं भाजपा का कहना है कि एम्स का फैसला भाजपा के कार्यकाल में हुआ।